Tuesday, February 10, 2026
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Rajasthan : अरावली विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, इस दिन होगी अहम सुनवाई…

अरावली पर्वतमाला से जुड़े विवाद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस बार विवाद की जड़ वह नई परिभाषा है, जिसके तहत केवल जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली माना जा रहा है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई का फैसला किया है।

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह भी शामिल होंगे। यह मामला सीजेआई की वेकेशन कोर्ट की सूची में पांचवें नंबर पर रखा गया है। ऐसे में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के संभावित निर्देशों पर सबकी नजर बनी हुई है।

क्या है पूरा विवाद ?

20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की उस सिफारिश को स्वीकार किया था, जिसमें अरावली पर्वतमाला की पहचान 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियों तक सीमित करने की बात कही गई थी। इससे पहले गोदावर्मन और एमसी मेहता से जुड़े मामलों (1985 से) के तहत अरावली क्षेत्र को व्यापक पर्यावरणीय संरक्षण प्राप्त था। नई परिभाषा सामने आने के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में विरोध शुरू हो गया।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे गंभीर पारिस्थितिक खतरा बताते हुए कहा कि इससे अरावली को अपूरणीय नुकसान पहुंच सकता है। विपक्षी दलों के नेताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों में खनन की अनुमति दी गई, तो अरावली की प्राकृतिक संरचना और अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं, केंद्र सरकार का तर्क है कि इस फैसले को लेकर गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं और अरावली का संरक्षण पहले की तरह जारी रहेगा।

विवाद के बाद केंद्र का कदम

मामला तूल पकड़ने के बाद केंद्र सरकार ने अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर रोक लगाने का फैसला किया। 24 दिसंबर को केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पूरी अरावली श्रृंखला में किसी भी तरह का नया खनन लीज जारी नहीं किया जाएगा। मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। यह आदेश पूरी अरावली पर्वतमाला पर समान रूप से लागू होगा।

केंद्र सरकार के लिखित बयान में कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फैली अरावली की सतत भूवैज्ञानिक श्रृंखला की रक्षा करना और अवैध व अनियमित खनन गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाना है। हालांकि, केंद्र के इस बयान पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई नेताओं ने कहा कि इसमें कुछ नया नहीं है और यह पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हिस्सा है, जिनका पालन किया जाना चाहिए।

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