Tuesday, February 10, 2026
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RBI ने रेपो रेट कम की, जानें कितनी कम देनी होगी EMI..

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 दिसंबर से शुरू हुई थी। दो दिनों तक चली इस बैठक में लिए गए निर्णयों की घोषणा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 दिसंबर को की। गवर्नर के अनुसार, रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई है। दिनभर की बड़ी खबरें, विशेषज्ञों की राय और आपके लोन पर इस फैसले के प्रभाव से जुड़ी सभी अपडेट इस लाइव ब्लॉग में उपलब्ध कराई जाएँगी।

इस साल तीसरी बार घटी रेपो दर

खुदरा महंगाई में लगातार गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से अब तक तीन किस्तों में कुल 1% की रेपो दर में कमी की है। हालांकि पिछले दो मौकों पर रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखा गया था। पिछले महीने गवर्नर मल्होत्रा ने भी संकेत दिया था कि ब्याज दरों में कमी की और गुंजाइश बनी हुई है।

GDP ग्रोथ छह तिमाहियों में सबसे तेज

RBI के अनुसार, वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) में वास्तविक GDP (Real GDP) में 8.2% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि है। यह उछाल घरेलू मांग के ऊँचे स्तर के कारण आया है, भले ही वैश्विक व्यापार और नीतिगत माहौल में अनिश्चितताएँ अभी भी मौजूद हैं।
सप्लाई साइड पर भी Real GVA में 8.1% की वृद्धि देखी गई, जिसमें उद्योग और सेवा क्षेत्र के सशक्त प्रदर्शन ने अहम योगदान दिया।

CPI महंगाई अनुमान घटकर 2%

RBI ने बताया कि अक्टूबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई ऐतिहासिक रूप से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई और यह गिरावट अनुमान से कहीं ज्यादा तेज रही। इसका मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी है, जबकि आमतौर पर सितंबर–अक्टूबर के दौरान इनकी कीमतें बढ़ती हैं। कोर महंगाई भी घटकर 2.6% पर आ गई है। कुल मिलाकर, कई श्रेणियों में महंगाई का दबाव कम होता दिखाई दे रहा है।

अच्छी खरीफ पैदावार, रबी फसलों की बेहतर बोआई, जलाशयों में पर्याप्त पानी और अनुकूल मिट्टी की नमी ने खाद्य आपूर्ति को मजबूत किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अधिकतर कमोडिटी की कीमतों में नरमी का रुझान दिखाई दे रहा है। इन्हीं अनुकूल परिस्थितियों के आधार पर, चालू वित्त वर्ष की CPI महंगाई का अनुमान घटाकर 2% कर दिया गया है, जो पहले जारी अनुमान से लगभग 0.6% कम है।

रेपो रेट क्या है ?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालीन धन उधार देता है। जब रेपो रेट घटती है, तो बैंकों को आरबीआई से कम ब्याज पर कर्ज मिलता है। परिणामस्वरूप, बैंक भी अक्सर अपनी ब्याज दरों में कमी करते हैं, जिससे ग्राहकों को सस्ते लोन का फायदा मिलता है।

रिवर्स रेपो रेट क्या होता है ?

दूसरी ओर, रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपना अतिरिक्त धन आरबीआई के पास जमा कराते हैं। यह मौद्रिक नीति का एक अहम साधन है, जिसका इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

जब आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, तो बैंकों को अतिरिक्त धन आरबीआई के पास रखने में अधिक लाभ मिलता है। इससे बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त लिक्विडिटी बाहर निकलती है, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में सहायक होती है।

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