Thursday, February 19, 2026
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दिल्ली-NCR में बेहद खराब स्थिति में प्रदूषण का स्तर, कई इलाकों में AQI 400 के पार

दिवाली के बाद प्रदूषण से परेशान राजधानी के लोगों को गुरुवार को तेज़ हवाओं से थोड़ी राहत मिली। हालाँकि, यह राहत अस्थायी मानी जा रही है। राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर अभी भी सामान्य से तीन गुना ज़्यादा है और शाम 4 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 305 दर्ज किया गया। यह बेहद खराब वायु गुणवत्ता है। ग्रेटर नोएडा में AQI 280, गाजियाबाद में 252, गुरुग्राम में 208 और नोएडा में 276 दर्ज किया गया। दिल्ली-एनसीआर में फरीदाबाद की हवा सबसे साफ़ रही, जहाँ AQI 198 रहा, जो मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का अनुमान है कि सोमवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में ही रहेगी। इससे सांस के रोगियों को परेशानी हो सकती है और आँखों में जलन भी हो सकती है। गुरुवार को अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 2650 मीटर थी। वेंटिलेशन इंडेक्स 14500 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। CPCB के अनुसार, पिछले 24 घंटों में हवा की गति बढ़ी है। ऐसे में गुरुवार को हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 10-15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली।

मानकों के अनुसार, दिल्ली की हवा तभी स्वस्थ मानी जाती है जब पीएम 10 का स्तर 100 से कम और पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम हो। गुरुवार शाम 4 बजे दिल्ली की हवा में पीएम 10 का स्तर 249 और पीएम 2.5 का स्तर 150.9 रहा। प्रदूषक कणों का स्तर मानकों से लगभग तीन गुना अधिक बना हुआ है। प्रदूषण और नमी के कारण दिल्ली के वातावरण में धुंध और धुएं की एक परत छाई हुई है। दिल्ली के पालम इलाके में सुबह हल्का कोहरा छाया रहा। सुबह करीब 8 बजे कोहरे और धुंध के कारण दृश्यता का स्तर घटकर 800 मीटर रह गया।

9 दिनों में बिगड़ी दिल्ली की हवा

अच्छे मानसून के कारण इस बार राजधानी की हवा आमतौर पर साफ रही, लेकिन पिछले नौ दिनों में प्रदूषक कणों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 13 अक्टूबर को AQI 189 पर था। हवा का यह स्तर मध्यम श्रेणी में माना जाता है और सुरक्षित सीमा के भीतर होता है। इसके बाद से वायु गुणवत्ता सूचकांक में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई है। पिछले तीन दिनों से दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से ऊपर यानी बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है। दिवाली की शाम हुई आतिशबाजी का धुआं अभी भी वातावरण में छाया हुआ है। हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक कणों के बिखराव की गति बहुत धीमी है।

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