Saturday, February 14, 2026
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फतेहपुर में मकबरे पर विवाद: मंदिर होने का दावा, पूजा के दौरान तोड़फोड़ से बढ़ा तनाव

फतेहपुर, उत्तर प्रदेश — जिले में स्थित नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर सोमवार को भारी बवाल हो गया। हिंदू संगठनों का दावा है कि यह स्थल मूल रूप से भगवान शिव और श्रीकृष्ण का प्राचीन मंदिर था, जिसे बाद में मकबरे में बदल दिया गया। इसी दावे के बाद बड़ी संख्या में लोग यहां पूजा-पाठ करने पहुंचे, जिसके दौरान तोड़फोड़ और झड़प की घटनाएं हुईं।

मजार पर तोड़फोड़ और पथराव

प्रशासन ने पहले से मकबरे की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और पुलिस बल तैनात किया था, लेकिन भीड़ के सामने ये इंतजाम नाकाफी साबित हुए। सदर तहसील क्षेत्र स्थित इस मकबरे को लेकर बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से इसे एक हजार साल पुराना मंदिर बताया था। उन्होंने परिसर में कमल और त्रिशूल के निशान को इसके मंदिर होने का प्रमाण बताया।

बीजेपी जिलाध्यक्ष के दावे से भड़का विवाद, इलाके में तनाव

मकबरे के भीतर प्रवेश के बाद कुछ लोगों ने मजार को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और हालात बिगड़ने पर मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौके पर पहुंच गए। दोनों पक्षों के बीच पथराव हुआ, जिससे इलाके में तनाव फैल गया।स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए जिला अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। फिलहाल क्षेत्र में कई थानों की अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात है।

दोनों पक्षों में झड़प, पुलिस और प्रशासन मौके पर तैनात

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अब्दुल समद मकबरा सदियों पुराना है और सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी नंबर 753) में दर्ज है। राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के सचिव मोहम्मद नसीम ने घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि इस तरह धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद खड़ा करना समाज के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या अब हर मस्जिद और मकबरे के नीचे मंदिर खोजा जाएगा?”

प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

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