हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर गंभीर सैन्य टकराव हुआ, जिसके बाद दोनों देशों ने 10 मई 2025 को संघर्ष विराम की घोषणा की। इसी दौरान पाकिस्तान को IMF से 1 अरब डॉलर की किस्त और 1.4 अरब डॉलर की नई ऋण सहायता मिली, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई।
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने IMF से पाकिस्तान को दी जा रही आर्थिक सहायता पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, यह आरोप लगाते हुए कि पाकिस्तान इस धन का उपयोग आतंकवाद के लिए कर सकता है। भारत ने IMF बोर्ड में मतदान से परहेज किया और IMF पर अपनी चिंताएं दर्ज कराईं।
IMF ने पाकिस्तान के लिए 11 नई शर्तें जोड़ी हैं, जिससे कुल शर्तों की संख्या 50 हो गई है। इन शर्तों में सबसे महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान को 2026 के बजट को IMF स्टाफ समझौते के अनुरूप संसद से पारित कराना होगा। IMF की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का रक्षा बजट अगले वित्त वर्ष के लिए 2.414 ट्रिलियन रुपये निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% अधिक है। पाकिस्तान सरकार ने IMF के अनुमानों से भी अधिक, लगभग 2.5 ट्रिलियन रुपये (18% वृद्धि) रक्षा बजट में आवंटित करने का संकेत दिया है, खासकर भारत के साथ हालिया संघर्ष के बाद।

