हिंदू धर्म में नवरात्रि को अत्यंत पवित्र और शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है। इस नौ दिवसीय उत्सव के आठवें दिन, जिसे अष्टमी कहा जाता है, मां महागौरी की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
मां महागौरी का दिव्य स्वरूप
मां महागौरी को सौम्यता, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका वर्ण अत्यंत गौर है, जिससे उनका नाम “महागौरी” पड़ा। चार भुजाओं से युक्त माता के हाथों में त्रिशूल, डमरु, अभय मुद्रा और वरमुद्रा होती है। उनका शांत और उज्ज्वल स्वरूप भक्तों के मन को शांति और भक्ति से भर देता है।
अष्टमी पर मां को प्रिय भोग
अष्टमी के दिन मां महागौरी को विशेष रूप से नारियल से बनी मिठाइयाँ अर्पित की जाती हैं, जैसे नारियल की बर्फी या लड्डू। इसके अलावा हलवा और काले चने का भोग लगाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है, जिसमें छोटी कन्याओं को भोजन और उपहार देकर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
पूजा विधि: कैसे करें मां को प्रसन्न
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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, विशेषकर सफेद वस्त्र पहनें।
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मां महागौरी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें।
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उन्हें सफेद वस्त्र और सफेद फूल अर्पित करें।
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कुमकुम से तिलक करें और दीप प्रज्वलित करें।
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विधिपूर्वक मंत्रों का जप करें।
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नारियल से बनी मिठाई, हलवा और काले चने का भोग लगाएं।
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अंत में मां की आरती उतारकर पूजा संपन्न करें।
मां महागौरी को प्रसन्न करने का मंत्र
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अष्टमी का यह पावन दिन केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का भी अवसर है। मां महागौरी की कृपा से जीवन में नई ऊर्जा, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
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