उत्तराखंड विधानसभा के पांच दिवसीय बजट सत्र की आज से शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित विधानसभा में राज्य का करीब 1.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है और राज्य के आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस बार खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री धामी ने पहली बार वित्त मंत्री के रूप में स्वयं बजट पेश किया। यह भी पहली बार हुआ जब राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही बजट पेश किया गया।
मुख्यमंत्री ने बजट को “आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में बड़ा कदम” बताते हुए कहा कि इसमें राज्य के सभी वर्गों—युवा, किसान, महिलाएं, उद्योग और पर्यटन क्षेत्र—को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं।
विकास और कल्याण योजनाओं पर जोर
सरकार ने बजट में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भी विशेष योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
बजट में ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। किसानों के लिए बागवानी और कृषि से जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा देने, जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए नई नीतियां लाने की भी घोषणा की गई है।
इसके अलावा महिलाओं और बच्चों के पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करने, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और न्याय व्यवस्था को तेज करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।

राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि यह बजट निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर केंद्रित है। हाल के वर्षों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि दर्ज की गई है और सरकार इस गति को आगे बढ़ाना चाहती है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा तथा आने वाले वर्षों में राज्य के विकास की नई दिशा तय करेगा।
















