Strait of Hormuz Crisis: पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने साफ किया है कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुद बंद कर सकता है। यह कदम सीधे तौर पर ईरान की अर्थव्यवस्था को झटका देने वाला माना जा रहा है, क्योंकि यह समुद्री मार्ग उसके तेल निर्यात की मुख्य लाइफलाइन है।
ईरान की तेल सप्लाई पर सीधा असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए ही ईरान अपना ज्यादातर कच्चा तेल दुनिया भर में भेजता है। ऐसे में अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो तेहरान की कमाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरानी तेल टैंकरों की आवाजाही पर भी सख्ती बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक शिपिंग सेक्टर में चिंता बढ़ गई है।
इन 4 बड़े पोर्ट पर पड़ सकता है असर
ताजा जानकारी के अनुसार, अगर अमेरिका समुद्री नाकाबंदी की ओर बढ़ता है, तो ईरान के चार प्रमुख पोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे—खार्क (खर्ग) द्वीप, जास्क टर्मिनल, बंदर अब्बास और बंदर खुमैनी। ये सभी ईरान के तेल निर्यात के अहम केंद्र माने जाते हैं।
चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान मार्च तक औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का निर्यात कर रहा था, जो पिछले तीन महीनों की तुलना में करीब 1 लाख बैरल प्रति दिन ज्यादा है। इस निर्यात से मिलने वाली आय का इस्तेमाल ईरान सरकार और सैन्य अभियानों में किया जा रहा है। ऐसे में होर्मुज पर नियंत्रण से अमेरिका इस फंडिंग को प्रभावित करना चाहता है।
तेल की कीमतों में उछाल का खतरा
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखने लगा है। पाकिस्तान में बातचीत विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो तेल और गैस की कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है।
पहले क्यों नहीं रोका गया था ईरानी तेल?
अमेरिका ने अब तक ईरानी तेल टैंकरों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई थी, क्योंकि इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बनी रहती थी और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती थी। इसी कारण मार्च में अमेरिका ने ईरान को अस्थायी लाइसेंस भी दिया था, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार तक पहुंच सका।
U.S. Energy Information Administration के अनुसार, यह मात्रा दुनिया की कुल मांग को करीब डेढ़ दिन तक पूरा करने के लिए पर्याप्त थी।
ईरान भी पहले कर चुका है होर्मुज बंद करने की धमकी
गौरतलब है कि इससे पहले ईरान ने भी युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी थी। हालांकि बाद में उसने सीमित रूप से रास्ता खोल दिया और कुछ तेल टैंकरों को भारी शुल्क लेकर गुजरने की अनुमति दी। मौजूदा हालात में ट्रंप का यह सख्त रुख न सिर्फ ईरान-अमेरिका तनाव को बढ़ा सकता है, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैश्विक नजर बनी रहेगी।
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