खालसा पंथ की चढ़दी कला और वीरता के प्रतीक राष्ट्रीय पर्व होला मोहल्ला का शुभारंभ आज पंजाब के पवित्र नगर किरतपुर साहिब में स्थित गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब से अत्यंत श्रद्धा और मर्यादा के साथ हुआ। श्री अखंड पाठ साहिब के विधिवत आरंभ के साथ ही समूचा वातावरण “बोले सो निहाल” के जयघोष से गुंज उठा। संगत गुरु चरणों में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करती दिखाई दी।
गुरु परंपरा की जीवंत विरासत
इस अवसर पर तख्त श्री केशगढ़ साहिब के मुख्य ग्रंथी भाई जोगिंदर सिंह ने भावपूर्ण अरदास की। उन्होंने समस्त मानवता की भलाई, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हुए संगत को इस ऐतिहासिक पर्व के आध्यात्मिक और वीर रस से जुड़े महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होला मोहल्ला केवल उत्सव नहीं, बल्कि गुरु परंपरा की जीवंत विरासत है।
श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण का संदेश
समारोह में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संगत को संबोधित करते हुए गुरु साहिब द्वारा प्रदत्त इस पवित्र पर्व को मर्यादा, अनुशासन और पूर्ण समर्पण भाव से मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पर्व खालसा पंथ की शक्ति, सेवा और एकता का प्रतीक है।
गुरबाणी की स्वर लहरियों से सजा समागम
कार्यक्रम के दौरान श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ मर्यादा अनुसार किया गया तथा श्री जपुजी साहिब का पाठ भी श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। गुर सेवा में प्रबंधक कमेटी के सदस्य, कर्मचारी और विभिन्न संत-समाजों की सम्मानित हस्तियां उपस्थित रहीं। सभी ने गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य माना। इस पावन अवसर पर कुलवंत सिंह, मलकीत सिंह, अमरजीत सिंह चावला, हरप्रीत सिंह, अमरजीत सिंह जिंदवड़ी, तलविंदर सिंह, गुरजीत सिंह, बलजिंदर सिंह, चंचल सिंह, दिलबाग सिंह और सुरिंदर सिंह राजा सहित अनेक प्रमुख श्रद्धालु मौजूद रहे।