Chaitra Navratri 2026 Day 6: चैत्र नवरात्रि 2026 के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मां कात्यायनी को नवदुर्गा का छठा स्वरूप माना जाता है, जिनकी उपासना से भक्तों को साहस, विजय और धर्म की प्राप्ति होती है। देवी पुराणों, विशेष रूप से देवी भागवत पुराण में इन्हें अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका नाम कात्यायनी पड़ा। 24 मार्च 2026 को नवरात्रि के छठे दिन उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
मां कात्यायनी का दिव्य स्वरूप
मां कात्यायनी का रूप अत्यंत तेजस्वी और आकर्षक बताया गया है। उनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला है और उनका वाहन सिंह है। देवी की चार भुजाएं होती हैं, जिनमें वे तलवार और कमल धारण करती हैं, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में होते हैं। यह स्वरूप शक्ति, साहस और दुष्टों के विनाश का प्रतीक माना जाता है।
पूजा से मिलने वाले लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और विशेष रूप से विवाह में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए वृंदावन की गोपियों ने भी कात्यायनी व्रत किया था। यही कारण है कि यह व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा देवी की आराधना से शत्रुओं पर विजय, आत्मबल में वृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
पूजा विधि और नियम
छठे दिन सुबह स्नान कर नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है। मां को गेंदा जैसे नारंगी फूल अर्पित करें और कुमकुम व अक्षत चढ़ाएं। पूजा के दौरान माता के समक्ष पान अर्पित कर अपनी मनोकामना व्यक्त करें। इसके बाद देवी की कथा पढ़कर आरती करें और सुबह-शाम इसी विधि से पूजा करें। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु संतरा, शहद, कपड़े और जूते-चप्पल आदि का दान कर सकते हैं। विवाहित महिलाओं को सुहाग सामग्री दान करना भी शुभ माना गया है।
मां कात्यायनी का प्रिय भोग
मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा हलवा या मीठा पान भी चढ़ाया जा सकता है।
करें इन मंत्रों का जाप
पूजा के दौरान “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। विवाह की कामना रखने वाले भक्त “कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि…” मंत्र का जप कर सकते हैं। वहीं तांत्रिक साधना के लिए “ॐ ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः” मंत्र का भी उल्लेख मिलता है। मंत्र जाप के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) का समय सबसे प्रभावी माना गया है और कम से कम 108 बार जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
मां कात्यायनी की भक्ति से मन होता है शांत
मां कात्यायनी की भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और सात्विक भाव से की गई पूजा न केवल मानसिक संतुलन देती है, बल्कि जीवन को सुख-समृद्धि और सफलता की ओर भी अग्रसर करती है।
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