बिहार में राजनीतिक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान बिहार के नए मुख्यमंत्री के ऐलान के लिए जिम्मेदार होंगे। भाजपा महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि शिवराज सिंह चौहान को राज्य में पार्टी की निगरानी और नेतृत्व चयन का पर्यवेक्षक बनाया गया है।
कैबिनेट की अंतिम बैठक 14 अप्रैल को
जानकारी के अनुसार, वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट की अंतिम बैठक 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे मुख्य सचिवालय में होगी। इसके पहले नीतीश कुमार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद नए मुख्यमंत्री के चयन पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि अभी तक विधायक दल की बैठक और नए सीएम की घोषणा की सही तारीख तय नहीं की गई है।
शिवराज सिंह चौहान का अनुभव और भूमिका
शिवराज सिंह चौहान को भाजपा का अनुभवी नेता माना जाता है, विशेषकर संकट प्रबंधन और संगठनात्मक मामलों में। उन्होंने पहले भी कई राज्यों में विधायक दल के नेता के चुनाव और नेतृत्व चयन की जिम्मेदारी निभाई है। मध्य प्रदेश में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के कारण उन्हें विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने का अनुभव है। इस अनुभव के आधार पर उन्हें बिहार में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए चुना गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस बीच, राजद नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और संभावित मुख्यमंत्री बदलाव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि शुरू से उनकी सहानुभूति नीतीश कुमार के साथ रही, लेकिन दबाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है। तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि अंतिम दौर में नीतीश कुमार को कई लोगों ने घेरकर राजनीतिक रूप से कमजोर किया।
राजनीतिक माहौल और संभावना
बिहार में मुख्यमंत्री बदलने की संभावना को लेकर राजनीतिक माहौल अत्यधिक संवेदनशील है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस बदलाव से राज्य में राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की दिशा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
नीतीश कुमार की संभावित विदाई और नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति बिहार की राजनीति में नया अध्याय खोल सकती है। शिवराज सिंह चौहान की केंद्रीय भूमिका और विधायकों के साथ उनका अनुभव इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने में अहम माना जा रहा है। 14 अप्रैल की कैबिनेट बैठक इस बदलाव की दिशा तय करने वाली होगी।
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