भारत को सदियों से आध्यात्म और मंदिरों की भूमि कहा जाता है। उत्तराखंड के हिमालयी धामों से लेकर कन्याकुमारी तक देश में ऐसे अनेक प्राचीन और पौराणिक मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी आस्थाएं और रहस्य आज भी लोगों को चकित कर देते हैं। इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित माता शारदा का मंदिर(sharda devi temple), जिसे आमतौर पर मैहर माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। त्रिकूट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में पूरे साल भक्तों की भीड़ लगी रहती है। खासतौर पर चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं और माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माता शारदा का यह मंदिर
माता शारदा का यह मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब इसी स्थान पर उनके गले का हार गिरा था। इसी कारण इस स्थान को ‘माई का हार’ कहा जाने लगा, जो समय के साथ बदलकर मैहर हो गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां-जहां माता सती के शरीर के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। पूरे भारत में ऐसे कुल 51 शक्तिपीठ बताए जाते हैं। मैहर का यह मंदिर भी उन्हीं पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है और यहां भक्तों की अटूट आस्था देखने को मिलती है।
बंद दरवाजों के पीछे से आती है घंटियों की आवाज
मैहर माता मंदिर से जुड़ा एक रहस्यमय प्रसंग भी काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि जब शाम के समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, तब भी मंदिर परिसर से घंटियों के बजने की आवाज सुनाई देती रहती है। यह आवाज रात में भी कई बार सुनाई देती है, जिसने इस मंदिर को और अधिक रहस्यमयी बना दिया है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वीर योद्धा आल्हा, जो माता शारदा के परम भक्त माने जाते हैं, आज भी मंदिर के बंद होने के बाद यहां आकर माता की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि वे सबसे पहले माता के दर्शन करते हैं। लोगों का दावा है कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जब मंदिर के पुजारी कपाट खोलने पहुंचते हैं, तो मां शारदा की प्रतिमा पर पहले से ही ताजे फूल चढ़े हुए मिलते हैं और मंदिर में घंटियों की ध्वनि गूंजती रहती है। यही कारण है कि भक्त इस स्थान को अत्यंत चमत्कारी और दिव्य मानते हैं।