गोरखपुर और कुशीनगर के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। इस रूट पर नई रेलवे लाइन(Railway Line) बिछाने की दिशा में अब ठोस कदम उठाया गया है। पडरौना-कुशीनगर वाया गोरखपुर के बीच प्रस्तावित करीब 64 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FSL) को मंजूरी मिल गई है। इस सर्वे के तहत पिलर मार्किंग, जमीन का विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस रेल परियोजना को पहली बार साल 2016 के रेल बजट में स्वीकृति मिली थी। हालांकि इसके बाद कई वर्षों तक यह योजना धीमी गति से ही आगे बढ़ती रही और 2025 तक हर साल नाममात्र का बजट आवंटित कर इसे जीवित रखा गया। अब जाकर इस प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़नी शुरू की है और सर्वे की मंजूरी के साथ निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत मानी जा रही है।
यात्रियों को मिलेगा तेज और सस्ता विकल्प
रेल लाइन बनने के बाद इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अनुमान है कि इससे एक लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा, जिन्हें अब तक केवल सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। ट्रेन सेवा शुरू होने से यात्रियों को कम खर्च में आसान और तेज सफर का विकल्प मिल सकेगा।
इसके अलावा, यह परियोजना पर्यटन के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है। कुशीनगर की अंतरराष्ट्रीय पहचान पहले से ही है, जहां जापान, चीन, थाईलैंड, श्रीलंका और तिब्बत जैसे देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान बुद्ध के दर्शन के लिए आते हैं। रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से यहां पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नई रेल लाइन के संचालन में कितना लगेगा समय ?
इस परियोजना में सरदारनगर में पहले से मौजूद ट्रॉम-वे संरचना का उपयोग भी किया जा सकता है, जिससे निर्माण कार्य में सुविधा मिलेगी। हालांकि पूरी रेल लाइन बिछाने और संचालन शुरू होने में अभी लगभग पांच साल का समय लग सकता है।