प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Modi) ने देश के विभिन्न हिस्सों को पत्र लिखकर नव-संवत्सर की बधाई दी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन और वैज्ञानिक कालगणना का आधार है। विक्रम संवत 2083 और युगाब्द 5128 की शुरुआत का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे हमारी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक जीवंतता का प्रमाण बताया। उत्तर भारत के राज्यों को भेजे संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नववर्ष हमारी परंपराओं के प्रति गर्व और आधुनिकता के बीच एक सेतु है।
विविधता में एकता ‘लोकतंत्र की जननी’
चैत्र नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने इसे शक्ति, साधना और अनुशासन का पर्व बताया। उन्होंने उपनिषदों के सूत्र ‘एकोऽहं बहुस्याम्’ (एक ही सत्य के अनेक रूप) का उल्लेख करते हुए एक गहरा दार्शनिक संदेश दिया।
उनके अनुसार, विविधता में एकता को देखने का यही दृष्टिकोण भारत को विश्व में ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में स्थापित करता है। माँ आदिशक्ति की उपासना को उन्होंने व्यक्तिगत तपस्या के साथ-साथ राष्ट्र के सामूहिक कल्याण और समावेशी विकास से जोड़कर प्रस्तुत किया।
जीवन के विविध रंग
दक्षिण और पश्चिम भारत के त्योहारों पर चर्चा करते हुए पीएम ने उगादी और गुड़ी पड़वा की सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उगादी के व्यंजन हमें जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों को समान भाव से अपनाने की शिक्षा देते हैं, जो एक नए कृषि चक्र और नई आशाओं का प्रतीक है।
वहीं, महाराष्ट्र और गोवा के लिए उन्होंने गुड़ी (ध्वज) को विजय और आत्मविश्वास का सूचक बताया। प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था-जैसे-जैसे भारत ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर बढ़ रहा है, ये पारंपरिक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़कर नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।