ब्रिटिश एयरवेज़ की फ्लाइट BA32 में एक दुखद घटना घटी, जब हांगकांग से लंदन जा रही फ्लाइट में 60 साल की महिला यात्री की उड़ान भरने के लगभग एक घंटे बाद ही मौत हो गई। यह घटना रविवार (22 मार्च 2026) को हुई। फ्लाइट एयरबस A350-1000 थी, जो हांगकांग से लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डा जा रही थी।
फ्लाइट जारी रखने का फैसला
महिला की मौत के बाद पायलटों ने फ्लाइट को बीच में रोकने या वापस लौटने के बजाय यात्रा जारी रखने का फैसला किया। आम तौर पर किसी यात्री की मौत को मेडिकल इमरजेंसी नहीं माना जाता। शुरुआत में क्रू मेंबर्स ने शव को टॉयलेट में रखने का सोचा, लेकिन बाद में इसे सही विकल्प नहीं माना गया। इसके बाद शव को ढककर विमान के पीछे वाले हिस्से, यानी गैली में रखा गया, जहां खाना तैयार किया जाता है।
बड़ी चूक और बदबू की समस्या
घटना के दौरान एक बड़ी चूक यह हुई कि जिस जगह शव रखा गया था, वहां की फर्श गर्म रहती है। इसके कारण समय के साथ वहां से बदबू आने लगी, जो धीरे-धीरे विमान के पिछले हिस्से में फैल गई। जैसे-जैसे फ्लाइट लंदन के करीब पहुंची, कई यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने उस हिस्से से तेज बदबू की शिकायत की।
लंदन हवाई अड्डे पर जांच
फ्लाइट में कुल 331 यात्री और स्टाफ मौजूद थे। जब फ्लाइट लंदन पहुंची, तो पुलिस विमान में आई और जांच के लिए सभी यात्रियों को करीब 45 मिनट तक सीट पर ही बैठे रहने के लिए कहा गया।
ब्रिटिश एयरवेज़ का बयान
कंपनी ने कहा कि उन्होंने सभी नियमों का सही तरीके से पालन किया और इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं मृत महिला के परिवार के साथ हैं। क्रू को भी पूरी तरह सहयोग दिया जा रहा है।
प्लेन पर मौत के नियम
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट यूनियन के दिशानिर्देशों के अनुसार, फ्लाइट के दौरान किसी यात्री की मौत होने पर शव को बैग में या कंबल से ढककर रखा जाता है। कोशिश की जाती है कि उसे किसी खाली सीट या कम दिखने वाली जगह पर रखा जाए। अगर फ्लाइट पूरी भरी हो, तो शव को उसकी सीट पर भी रखा जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट के दौरान मौत के मामले बहुत कम होते हैं। 2013 में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी स्टडी के अनुसार, उड़ान के दौरान होने वाली मेडिकल इमरजेंसी में सिर्फ 0.3 प्रतिशत मामलों में ही मौत होती है।
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