संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस बार मुद्दा था कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की स्थिति। भारत के स्थायी मिशन में तैनात एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि जिस क्षेत्र की वह बात कर रहा है, वहां की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि उसका बजट अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मदद से भी छोटा है।
भारत की ओर से यह बयान उस वक्त आया जब पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की कोशिश की। भारतीय प्रतिनिधि ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और वहां तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
राजनयिक ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे की हालत बेहद खराब है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था IMF की खैरात से भी छोटी हो, वहां के लोगों को असली आजादी और विकास की जरूरत है, न कि राजनीतिक बयानबाजी की।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब International Monetary Fund ने हाल ही में पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबारने के लिए राहत पैकेज दिया है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत लंबे समय से कमजोर बनी हुई है, और उसे बार-बार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद लेनी पड़ रही है।
भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी दोहराया कि 2019 में Article 370 Abrogation के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज हुई है। उन्होंने कहा कि वहां निवेश बढ़ा है, पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी मजबूत हुई है। हाल ही में स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए, जो क्षेत्र में सामान्य स्थिति की बहाली का संकेत है।
पाकिस्तान की ओर से लगातार कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन भारत हर बार इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए खारिज करता आया है। भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद बंद करना चाहिए और अपने नागरिकों के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भारत का यह रुख उसकी कूटनीतिक मजबूती को दर्शाता है। भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास उसकी प्राथमिकता है, जबकि पाकिस्तान आंतरिक आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र में दिया गया यह बयान सिर्फ एक जवाब नहीं, बल्कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश भी माना जा रहा है कि भारत अपने आंतरिक मामलों पर किसी भी तरह की बाहरी टिप्पणी को स्वीकार नहीं करेगा।
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VIDEO | Switzerland: At the High-Level Segment of the 55th Regular Session of the UN Human Rights Council, First Secretary, Anupama Singh in Geneva, says, “India is compelled to exercise its right of reply in response to the references made during the high-level segment by… pic.twitter.com/uHOrmIEf4g
— Press Trust of India (@PTI_News) February 26, 2026
















