PNG Application Process: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और एलपीजी सिलेंडर की संभावित किल्लत के बीच सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब नए पीएनजी कनेक्शन को 7 दिनों के भीतर मंजूरी देने का निर्देश जारी किया गया है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट करना है।
PNG कनेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में पीएनजी कनेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है और कम समय में बड़ी संख्या में नए कनेक्शन जारी किए गए हैं। खास बात यह है कि अब इसके लिए लोगों को गैस एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे अपने मोबाइल फोन के जरिए घर बैठे ही आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन से आसान हुई प्रक्रिया
PNG कनेक्शन के लिए उपभोक्ता संबंधित गैस कंपनी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर आसानी से आवेदन कर सकते हैं। यहां “अप्लाई ऑनलाइन” विकल्प चुनकर डोमेस्टिक पीएनजी कनेक्शन का चयन करना होता है। इसके बाद पिन कोड डालकर यह जांचा जाता है कि आपके क्षेत्र में पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है या नहीं।
उपभोक्ता को रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना जरूरी
यदि सुविधा उपलब्ध होती है, तो उपभोक्ता को रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होता है और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। इसके बाद सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है, जो आमतौर पर 5000 से 7000 रुपये के बीच होता है। पेमेंट के बाद एक रेफरेंस नंबर जारी किया जाता है, जिससे आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकती है।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
PNG कनेक्शन के लिए पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट में से कोई एक दस्तावेज देना अनिवार्य है। पते के प्रमाण के लिए बिजली बिल, टेलीफोन बिल, राशन कार्ड या प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद जरूरी होती है। किराए के मकान में रहने वालों को मकान मालिक की एनओसी और रेंट एग्रीमेंट भी देना होगा। इसके अलावा पासपोर्ट साइज फोटो को पहले से डिजिटल फॉर्मेट (पीडीएफ या जेपीईजी) में तैयार रखना जरूरी है।
वेरिफिकेशन और इंस्टॉलेशन प्रक्रिया
पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया अलग-अलग कंपनियों में थोड़ी भिन्न हो सकती है। कुछ कंपनियां आवेदन के समय ही फीस लेती हैं, जबकि कुछ बाद में भुगतान का विकल्प देती हैं। कई कंपनियां सिक्योरिटी डिपॉजिट को किस्तों में जमा करने की सुविधा भी देती हैं। वेरिफिकेशन के लिए कुछ मामलों में आधार आधारित ई-केवाईसी से तुरंत प्रक्रिया पूरी हो जाती है, जबकि कुछ जगहों पर कंपनी की टीम घर आकर दस्तावेजों की जांच करती है। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही पाइप लाइन बिछाने और कनेक्शन देने का काम शुरू होता है। सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में पीएनजी कनेक्शन की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं को एलपीजी पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
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