हिंदू धर्म में मां दुर्गा की आराधना के लिए साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इनमें चैत्र और शारदीय (आश्विन) नवरात्रि(Navratri) सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं, जबकि माघ और आषाढ़ माह में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जो आम लोगों के बीच कम चर्चित होती है।
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधनाओं और गोपनीय पूजा के लिए जानी जाती है। इसमें साधक अपनी उपासना को गुप्त रखते हैं और विशेष मंत्र व साधनाएं करते हैं। वहीं सामान्य नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक दोनों प्रकार की पूजा का विधान होता है।
कब से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि है?
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च, गुरुवार से हो रहा है, जिसका समापन 27 मार्च को होगा। इसी दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा।
माघ गुप्त नवरात्रि
माघ मास में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है और यह साल की पहली नवरात्रि होती है। यह आमतौर पर जनवरी या फरवरी में आती है। इस दौरान देवी की विशेष तांत्रिक साधनाएं और गुप्त उपासना की जाती है, जो खास साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चैत्र नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह वर्ष का पहला महीना माना जाता है और इसी में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है, जो मार्च-अप्रैल के बीच पड़ती है। इस नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ माह (जून-जुलाई) में आने वाली नवरात्रि को दूसरी गुप्त नवरात्रि माना जाता है और यह साल की तीसरी नवरात्रि होती है। इस दौरान भी तंत्र साधना, विशेष मंत्रों का जाप और महाविद्याओं की उपासना की जाती है।
शारदीय नवरात्रि
आश्विन माह में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि सितंबर-अक्टूबर के बीच मनाई जाती है। यह नवरात्रि सबसे लोकप्रिय होती है और अधिकतर गृहस्थ लोग इसी को धूमधाम से मनाते हैं। इसके समापन पर विजयदशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाता है, जो असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।