Middle East Crisis Discussion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन बातचीत को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बातचीत केवल दोनों नेताओं के बीच ही हुई थी और इसमें किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी नहीं थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कहा कि इस संवाद का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा करना था। मंत्रालय ने उन रिपोर्ट्स का भी खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि इस बातचीत के दौरान एलन मस्क भी शामिल थे।
रिपोर्ट्स में किया गया था अलग दावा
दरअसल, The New York Times की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति पर हुई बातचीत के दौरान एलन मस्क भी फोन कॉल में मौजूद थे। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई थी। हालांकि, भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि बातचीत में किसी भी गैर-सरकारी व्यक्ति की भागीदारी नहीं थी।
व्हाइट हाउस ने बताया ‘सार्थक संवाद’
वहीं, व्हाइट हाउस की ओर से भी इस बातचीत को सकारात्मक बताया गया। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं और यह बातचीत बेहद सार्थक रही।
पश्चिम एशिया पर हुई अहम चर्चा
बताया गया कि इस बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से Strait of Hormuz को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मस्क-ट्रंप रिश्तों को लेकर भी चर्चा
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि एलन मस्क की कथित मौजूदगी से उनके और ट्रंप के बीच संबंधों में सुधार के संकेत मिलते हैं। पहले दोनों के रिश्तों में कुछ तनाव की बात सामने आई थी, खासकर तब जब मस्क सरकारी भूमिका से अलग हुए थे। विदेश मंत्रालय के इस स्पष्ट बयान के बाद यह साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत पूरी तरह आधिकारिक और द्विपक्षीय थी, जिसमें किसी भी बाहरी व्यक्ति की भूमिका नहीं थी।
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