उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेरठ से हरिद्वार और ऋषिकेश तक नई रैपिड रेल या मेट्रो चलाने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के समक्ष रखा है। यह योजना दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के बाद तेज कनेक्टिविटी देने वाला नया प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
संभावित रूट और स्टेशन
प्रस्तावित रैपिड रेल मेरठ के मोदीपुरम से शुरू होकर दौराला, सकौती, मुजफ्फरनगर के खतौली तक जाएगी। यूपी-उत्तराखंड सीमा पर पुरकाजी स्टेशन प्रमुख होगा। इसके बाद रुड़की, ज्वालापुर, हरिद्वार और अंतिम स्टेशन ऋषिकेश तय किया गया है। यह रूट NH-58 के समानांतर बनाया जा सकता है।
दिल्ली से यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो दिल्ली से ऋषिकेश और हरिद्वार की यात्रा मात्र 2.5 से 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे धार्मिक यात्राओं और वीकेंड ट्रिप की सुविधा बढ़ेगी। इसके अलावा, मोदीपुरम जंक्शन बनकर उभरेगा, मुजफ्फरनगर इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित होगा और रुड़की में छात्रों के लिए हाउसिंग व पीजी की मांग बढ़ सकती है।
पर्यटन और रियल एस्टेट पर असर
हरिद्वार और ऋषिकेश पहले से ही धार्मिक और एडवेंचर टूरिज्म के बड़े केंद्र हैं। तेज कनेक्टिविटी से वीकेंड होम, रेंटल विला और होमस्टे की मांग बढ़ सकती है। NH-58 के आसपास जमीन की कीमतें बढ़ने की संभावना है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तेजी आएगी।
पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियां
रुड़की से ऋषिकेश के बीच का इलाका राजाजी नेशनल पार्क के पास है। संवेदनशील इकोसिस्टम और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण ट्रैक को एलिवेटेड या सुरंग के माध्यम से बनाना पड़ सकता है। जमीन अधिग्रहण और उच्च लागत प्रोजेक्ट के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
मेरठ–हरिद्वार–ऋषिकेश रैपिड रेल कॉरिडोर न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा बल्कि एक बड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर भी साबित हो सकता है। यह परियोजना पर्यटन, उद्योग, रियल एस्टेट और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि पर्यावरण और लागत जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखकर ही इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
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