देश में रसोई गैस को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को इसे अपनाना अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार ने साफ किया है कि PNG उपलब्ध होने के बावजूद इसे न अपनाने वाले परिवारों की LPG सप्लाई बंद की जा सकती है।
PNG को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला
सरकार का उद्देश्य गैस नेटवर्क का विस्तार करना और एक ही ईंधन पर निर्भरता को कम करना है। आदेश के मुताबिक, यदि किसी इलाके में PNG कनेक्शन उपलब्ध है और उपभोक्ता तीन महीने के भीतर इसे नहीं लेते हैं, तो उनकी LPG आपूर्ति रोक दी जाएगी। हालांकि, जहां पाइपलाइन संभव नहीं है, वहां NOC के आधार पर LPG सप्लाई जारी रहेगी।
तेजी से बढ़ रहे PNG कनेक्शन
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पिछले 25 दिनों में करीब 25 लाख नए PNG कनेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा लगभग 22 लाख उपभोक्ता LPG से PNG में शिफ्ट हो चुके हैं और 25 लाख नए आवेदन भी प्राप्त हुए हैं।
LPG सप्लाई को लेकर स्थिति स्पष्ट
सरकार ने LPG की कमी की खबरों को अफवाह बताते हुए कहा है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग सामान्य रूप से चल रही है और 26 राज्यों में 22,000 टन से अधिक कमर्शियल LPG की आपूर्ति की जा चुकी है।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई
गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार और राज्य प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हाल ही में विभिन्न राज्यों में हजारों छापे मारे गए, जिनमें बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर जब्त किए गए।
केरोसिन का भी सहारा
सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के तौर पर 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है, ताकि जरूरत के समय आम जनता को राहत मिल सके। सरकार का मानना है कि PNG के बढ़ते उपयोग से न केवल सप्लाई सिस्टम आसान होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बार-बार सिलेंडर बुकिंग की झंझट से भी छुटकारा मिलेगा।
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