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काशी पर चढ़ा रंगभरी एकादशी का रंग, शिव भक्तों ने मनाया बाबा भोलेनाथ के गौने का उत्सव, निकाली गई शोभायात्रा

रंगभरी एकादशी आते ही काशी पूरी तरह होली के रंग में डूब जाती है। एक ओर बाबा के गौना का उत्सव मनाया जाता है, तो दूसरी तरफ मसान की होली की अनोखी छटा शहर को अक्खड़ बनारसी अंदाज़ में रंग देती है। यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत संगम है।

धर्मनगरी वाराणसी के रवींद्रपुरी स्थित बाबा कीनाराम आश्रम से हर साल की तरह इस बार भी धूमधाम से शिव बारात निकाली गई। डमरू की थाप, शंखनाद और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से पूरा इलाका शिवमय हो उठा। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में बाराती बनकर नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे, मानो स्वयं भोलेनाथ की बारात सजी हो।

शोभायात्रा में सजाई गईं आकर्षक झांकियां

शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां सजाई गईं, जो भगवान शिव की लीलाओं और महिमा को दर्शा रही थीं। भक्तों के हाथों में त्रिशूल और अन्य धार्मिक प्रतीक वातावरण में भक्ति की ऊर्जा भर रहे थे। रंगों से सराबोर लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर उत्सव की खुशी साझा कर रहे थे।

मसान की होली की यह परंपरा काशी की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। स्थानीय लोग और दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। भक्ति गीतों, नृत्य और उत्साह से भरे इस आयोजन ने पूरे माहौल को आनंद और उमंग से भर दिया।

सुरक्षा के विशेष इंतजाम

इस बारात का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि भगवान शिव की आराधना के साथ काशी की प्राचीन परंपराओं को जीवित रखना भी है। आयोजकों ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा, ताकि श्रद्धालु निर्भय होकर इस दिव्य अनुभव का हिस्सा बन सकें।

रवींद्रपुरी से निकली मसान की होली की शोभायात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि काशी में उत्सव सिर्फ मनाए नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं। आस्था, उल्लास और भाईचारे का यह अनोखा संगम हर साल शहर की सांस्कृतिक विरासत को और भी समृद्ध बना देता है।

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