Jammu & Kashmir Census: जम्मू-कश्मीर में करीब 16 साल के अंतराल के बाद जनगणना प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है। साल 2011 के बाद अब 2026 में यह अहम प्रक्रिया शुरू की जा रही है। आमतौर पर जनगणना हर 10 साल में होती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों के कारण यहां यह कार्य 16 साल बाद हो रहा है। इस बार की जनगणना खास इसलिए भी है क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस तरीके से आयोजित किया जाएगा, जो ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
30 हजार से अधिक कर्मचारी होंगे तैनात
जनगणना को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सरकार ने 30,000 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए प्रशिक्षण प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रदेश के प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर अमित शर्मा के अनुसार, लंबे अंतराल के बाद होने के कारण इस जनगणना को लेकर लोगों और प्रशासन दोनों में उत्सुकता है।
डिजिटल डिवाइस से होगा डेटा कलेक्शन
इस बार सभी सुपरवाइजर डिजिटल डिवाइस के जरिए लोगों का डेटा दर्ज करेंगे, जो सीधे सूचना केंद्र तक पहुंच जाएगा। इसके बाद इस डेटा को जल्द ही सार्वजनिक भी किया जाएगा। अमित शर्मा ने बताया कि यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ की सोच को जमीन पर उतारने का एक उदाहरण है, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।
17 मई से शुरू होगी ‘स्व-गणना’
जनगणना से पहले लोगों को ‘स्व-गणना’ का विकल्प भी दिया जा रहा है। इसके तहत नागरिक 17 मई 2026 से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खुद को रजिस्टर कर सकेंगे। इसके बाद जून 2026 में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन शुरू होगा, जो जनगणना की पहली कड़ी होगी।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
अटल ढुल्लू के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 2026 के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना होगी, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 में मैदानी इलाकों में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियां
जम्मू-कश्मीर की कठिन भौगोलिक स्थिति जनगणना के सामने बड़ी चुनौती है। कई दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा सीमित है, जिसके चलते वहां कर्मचारियों को घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करनी होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।
विकास योजनाओं के लिए अहम डेटा
गौरतलब है कि अभी तक प्रदेश में विकास योजनाएं 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनाई जा रही हैं। ऐसे में नई जनगणना से ताजा आंकड़े मिलेंगे, जो भविष्य की योजनाओं और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे।
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