इज़रायल के ताज़ा हमलों में ईरान(Israel US Attack on Iran) के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। क्षेत्र में संघर्ष की आंच तेज हो चुकी है और कई देश सतर्क मोड में आ गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से एक व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया है।
उनके अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा, जटिल और शक्तिशाली सैन्य ऑपरेशन है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन स्थापित करना है। इसी बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़रायल की ओर कई मिसाइलें दागीं। साथ ही, रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर बड़ा ड्रोन हमला भी किया गया। इस घटना के बाद ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान को उसके कदमों का परिणाम जल्द ही भुगतना पड़ेगा।
नतान्ज परमाणु केंद्र फिर बना निशाना
शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि हालिया हमलों में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि, सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिला है कि नतान्ज परमाणु संवर्धन केंद्र को एक बार फिर निशाना बनाया गया है। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।
ऑपरेशन की वजह पर अमेरिकी पक्ष
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने अभियान की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान लगातार परमाणु ईंधन संवर्धन को अपना “अविभाज्य अधिकार” बताता रहा है। उनके अनुसार, अमेरिका ने इस रुख को क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा माना।
विटकॉफ ने कहा कि इसी टकरावपूर्ण स्थिति ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” की शुरुआत को जन्म दिया। मौजूदा घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में अस्थिरता को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।