Iran ने गुरुवार को 19 साल के उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय पहलवान सालेह मोहम्मदी (Saleh Mohammadi) को फांसी दे दी, जिससे खेल और मानवाधिकार जगत में एक गहरा शोक फैल गया है। सालेह को ‘मोहारेबे’ यानी खुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई। इसी आरोप में मेहदी घासेमी और सईद दाऊदी को भी फांसी दी गई।
मानवाधिकार संगठन ने उठाये सवाल
सरकारी मीडिया के अनुसार, 8 जनवरी को कोम शहर में इन तीनों पर पुलिसकर्मियों पर तलवार और चाकुओं से हमला करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, कई मानवाधिकार संगठन इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं और उनका कहना है कि बयान दबाव में लिए गए हो सकते हैं।
ईरान में ‘मोहारेबे’ का कानून बेहद सख्त है और इसमें केवल मृत्युदंड की सजा ही निर्धारित है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय खेल और मानवाधिकार समुदाय में भारी चिंता पैदा कर रहा है, क्योंकि सालेह मोहम्मदी कुश्ती में एक उभरता हुआ और प्रतिभाशाली चेहरा माना जाता था।
जेल में कई एथलीट कैद
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह कदम देश के भीतर कड़े दमन और युवा एथलीटों के खिलाफ सख्ती की नई मिसाल है। वर्तमान में जेल में कई ऐसे एथलीट कैद हैं, जिन पर इसी प्रकार के गंभीर आरोप हैं और मौत का खतरा मंडरा रहा है।
ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति की जटिलताओं के बीच यह घटना देश और दुनिया के लिए एक चेतावनी स्वरूप सामने आई है कि खेल और युवा प्रतिभा भी राजनीतिक और कानूनी संघर्षों में फंस सकते हैं।
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