अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए हालिया सीजफायर पर भारत ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक सकारात्मक पहल हो सकती है।
MEA के बयान में कहा गया, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे क्षेत्र में स्थिरता और शांति स्थापित होगी।” मंत्रालय ने एक बार फिर ज़ोर देते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, और तनाव कम करना बेहद जरूरी है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस लंबे संघर्ष के कारण आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क भी प्रभावित हुए हैं। भारत ने उम्मीद जताई कि होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते समुद्री आवागमन अब सामान्य रहेगा और वैश्विक व्यापार में स्थिरता लौटेगी।
वहीं, सीजफायर के बाद ईरान ने खुद को विजेता बताते हुए दावा किया है कि उसने अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। यह दावा ऐसे समय में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों को रोकते हुए दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति जताई।
ईरान की ओर से एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसे लेकर दावा किया गया कि अमेरिका ने सिद्धांत रूप में इसे स्वीकार कर लिया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों के बयानों में कुछ विरोधाभास भी देखने को मिले हैं, जो अलग-अलग माध्यमों में सामने आए।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया कि यदि ईरान पर हमले पूरी तरह रुक जाते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई को रोक सकता है।
कुल मिलाकर, यह सीजफायर फिलहाल राहत लेकर आया है, लेकिन इसकी स्थिरता आने वाले दिनों में होने वाली कूटनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगी।

