कनाडा सरकार ने अपने इमिग्रेशन और शरण तंत्र को अधिक सख्त और प्रभावी बनाने के लिए एक नया कानून लागू किया है। इस कदम के तहत अधिकारियों को अब आवेदनों को स्वीकार करने, रोकने या पूरी तरह समाप्त करने तक के व्यापक अधिकार मिल गए हैं। माना जा रहा है कि यह फैसला देश की सीमा सुरक्षा(Canada Border Security) और इमिग्रेशन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
26 मार्च को ‘इमिग्रेशन सिस्टम एंड बॉर्डर्स एक्ट’ (बिल C-12) को शाही मंजूरी मिलने के साथ ही यह लागू हो गया। इस कानून के तहत अधिकारियों को वर्क परमिट, स्टडी परमिट, टेम्पररी वीज़ा और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े दस्तावेज़ों को निलंबित, रद्द या संशोधित करने का अधिकार मिल गया है। इसके साथ ही वे अस्थायी निवासियों पर शर्तें लगाने या उनमें बदलाव भी कर सकते हैं।
सुरक्षा और सीमा नियंत्रण पर फोकस
इस कानून का मुख्य उद्देश्य देश की सीमाओं को सुरक्षित करना और इमिग्रेशन सिस्टम को अधिक मजबूत बनाना है। इसके जरिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संगठित अपराध, अवैध फेंटानिल तस्करी और गैरकानूनी फंडिंग से निपटने के लिए अतिरिक्त संसाधन और अधिकार दिए गए हैं।
राज्यों के साथ बेहतर तालमेल
नई व्यवस्था के तहत संघीय सरकार अब इमिग्रेशन से जुड़ी जरूरी जानकारी प्रांतों और क्षेत्रों के साथ साझा कर सकेगी। यह प्रक्रिया औपचारिक समझौतों के माध्यम से होगी और इसमें निजता से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा। इससे विभिन्न सरकारी स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
विशेष परिस्थितियों में प्रोसेसिंग पर रोक
कानून में यह प्रावधान भी किया गया है कि यदि सिस्टम की विश्वसनीयता, सार्वजनिक सुरक्षा या तकनीकी समस्याओं से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, तो कुछ आवेदनों की प्रोसेसिंग को अस्थायी रूप से रोका या सीमित किया जा सकता है। इससे अचानक बढ़ते आवेदनों के दबाव को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।
नए नियमों के तहत, जो व्यक्ति कनाडा में प्रवेश के एक साल बाद शरण का दावा करते हैं, उनके मामलों को आमतौर पर इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास नहीं भेजा जाएगा। इसी तरह, जो लोग कनाडा-अमेरिका सीमा को अनधिकृत तरीके से पार करते हैं और 14 दिनों के बाद दावा करते हैं, उनके आवेदन भी नियमित सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
भारतीय आवेदकों की बड़ी संख्या
कनाडा में शरण मांगने वालों में भारतीय नागरिकों की संख्या काफी अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में हजारों भारतीयों ने शरण के लिए आवेदन किया है, जिनमें बड़ी संख्या पंजाब से जुड़ी बताई जाती है। ऐसे में नए नियमों का इन आवेदनों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
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