इंडियन प्रीमियर लीग का 19वां सीजन इस समय खेला जा रहा है और यह टूर्नामेंट अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। साल 2008 में 8 टीमों के साथ शुरू हुआ यह लीग आज दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मंचों में गिना जाता है। हालांकि, पिछले 18 वर्षों से पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर इस लीग में खेलने पर रोक लगी हुई है और भविष्य में भी उनकी वापसी की संभावना कम ही नजर आती है।
पहले सीजन की तस्वीर
दिलचस्प बात यह है कि आईपीएल के पहले सीजन यानी 2008 में पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उस समय कुल 11 पाकिस्तानी क्रिकेटर अलग-अलग टीमों का हिस्सा बने थे। इनमें सबसे ज्यादा खिलाड़ी कोलकाता नाइट राइडर्स के पास थे, जबकि कुछ अन्य टीमों ने भी उन पर भरोसा जताया था।
किन टीमों में खेले खिलाड़ी
2008 के सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स, डेक्कन चार्जर्स, राजस्थान रॉयल्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और दिल्ली डेयरडेविल्स में पाकिस्तानी खिलाड़ी शामिल थे। वहीं मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और पंजाब किंग्स में एक भी पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं खेला था।
प्रमुख खिलाड़ियों के नाम
कोलकाता की टीम में शोएब अख्तर, मोहम्मद हफीज, उमर गुल और सलमान बट शामिल थे। राजस्थान रॉयल्स में यूनिस खान, कामरान अकमल और सोहेल तनवीर खेले। दिल्ली की टीम में शोएब मलिक और मोहम्मद आसिफ थे, जबकि डेक्कन चार्जर्स में शाहिद अफरीदी और आरसीबी में मिस्बाह-उल-हक शामिल थे।
अजहर महमूद का खास मामला
बैन के बावजूद एक पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी अजहर महमूद ऐसे रहे, जिन्होंने बाद के सीजन में आईपीएल खेला। उन्होंने 2012 और 2013 में पंजाब किंग्स के लिए और 2015 में कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए खेला। दरअसल, ब्रिटिश पासपोर्ट होने के कारण उन्हें इस लीग में खेलने की अनुमति मिली थी।
आज आईपीएल पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका है और दुनिया के लगभग हर बड़े क्रिकेटर का सपना इस लीग में खेलना होता है। बावजूद इसके, पाकिस्तान के खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी इस टूर्नामेंट की एक अहम और चर्चित सच्चाई बनी हुई है।
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