Iran Bandar Abbas Vishnu Temple: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव के बीच अब ईरान में मौजूद भारतीय धार्मिक स्थलों की भी चर्चा तेज हो गई है, खासकर वहां स्थित एक प्राचीन हिंदू मंदिर को लेकर।
130 साल पुराना है ये विष्णु मंदिर
ईरान के बंदर अब्बास शहर, जो होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, वहां भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐतिहासिक मंदिर मौजूद है। इस मंदिर को लगभग 130 साल पुराना बताया जाता है। इसका निर्माण 19वीं सदी के अंत में भारतीय व्यापारियों ने करवाया था, जो उस समय समुद्री व्यापार के लिए यहां बसे थे। बाद में 1982 में इसका पुनर्निर्माण कराया गया।
भारतीय व्यापारियों से जुड़ा है इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, गुजरात और कच्छ के व्यापारी उस दौर में ईरान के बंदरगाह शहरों में रहते थे। विदेश में रहते हुए अपनी आस्था और संस्कृति को जीवित रखने के लिए उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया। माना जाता है कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े भारतीयों की भी इसमें भूमिका रही।
वास्तुकला में दिखता है भारतीय और फारसी मेल
इस मंदिर की बनावट इसे बेहद खास बनाती है। इसमें भारतीय मंदिरों की पारंपरिक शैली के साथ फारसी और इस्लामी वास्तुकला का प्रभाव भी साफ नजर आता है। मंदिर में एक चौरस कक्ष और ऊपर गुंबद बना है, जो स्थानीय स्थापत्य से प्रेरित है। निर्माण में मूंगा पत्थर, मिट्टी, मोर्टार और विशेष चूने का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के भीतर भगवान कृष्ण के चित्र भी मौजूद हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
चाबहार और तेहरान में भी भारतीय आस्था के प्रतीक
ईरान के चाबहार में भी एक हिंदू मंदिर स्थित है, जिसे गुजरात से आए व्यापारियों ने 19वीं-20वीं सदी के आसपास बनवाया था। इसके अलावा राजधानी तेहरान में ‘भाई गंगा सिंह सभा’ नाम का एक गुरुद्वारा भी है, जिसे 1941 में बनवाया गया था और स्थानीय तौर पर ‘मस्जिद-ए-हिंदन’ के नाम से जाना जाता है। यहां हर शुक्रवार को लंगर का आयोजन भी होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस गुरुद्वारे का दौरा कर चुके हैं।
आज सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मौजूद
20वीं सदी के मध्य में जब अधिकांश भारतीय व्यापारी वापस लौट गए, तो यह मंदिर धीरे-धीरे शांत हो गया। हालांकि आज भी इसकी संरचना सुरक्षित है और इसे ईरान की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया गया है। पर्यटक और इतिहास प्रेमी इसे देखने आते हैं, जो भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों की जीवित मिसाल है।
कम संख्या में हैं हिंदू और सिख समुदाय
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में हिंदुओं की संख्या बहुत कम है। Pew Research Center के अनुसार, 2010 में यहां करीब 20 हजार हिंदू रहते थे। वहीं सिख समुदाय की संख्या भी बेहद सीमित है, लेकिन उनके धार्मिक स्थल आज भी वहां मौजूद हैं।
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