हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां एम्स बिलासपुर(Aiims bilaspur) कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई तकनीक के साथ एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल करने जा रहा है। यहां सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को जल्द ही अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक उपकरण मिलने वाले हैं, जो मरीजों के इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
नई तकनीक के आने के बाद अब जटिल ट्यूमर और कैंसर की गांठों को निकालने के लिए बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूरबीन विधि यानी लैप्रोस्कोपी के जरिए सर्जरी की जाएगी, जिसमें शरीर पर बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी पहले से काफी तेज होती है।
एडवांस तकनीक से सटीक इलाज
नए लैप्रोस्कोपिक सेट में हाई-स्पीड ड्रिल सिस्टम और इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट जैसे आधुनिक फीचर्स शामिल होंगे। ये उपकरण सर्जन को शरीर के अंदर हाई-डेफिनिशन दृश्य प्रदान करेंगे, जिससे बेहद बारीकी से ऑपरेशन करना संभव होगा। खास वेसल सीलर तकनीक सर्जरी के दौरान खून की नसों को तुरंत सील कर देती है, जिससे रक्तस्राव बहुत कम होता है।
कम समय में रिकवरी
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज को जल्दी आराम मिलता है। जहां पहले सर्जरी के बाद ठीक होने में दो हफ्ते तक लग जाते थे, वहीं अब मरीज 4-5 दिनों में अस्पताल से छुट्टी पा सकते हैं। छोटे चीरे होने के कारण शरीर का कम हिस्सा खुलता है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बेहद कम हो जाता है।
इलाज होगा सस्ता और सुलभ
अब तक इस तरह की हाईटेक सर्जरी के लिए मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन एम्स बिलासपुर में यही सुविधाएं अब किफायती दरों पर उपलब्ध होंगी। इससे न सिर्फ हिमाचल बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी राहत मिलेगी।
ऑन्कोलॉजी के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए ये उपकरण कैंसर की स्थिति और उसके फैलाव को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेंगे। इससे सर्जरी अधिक सटीक होगी और इलाज की सफलता दर में भी इजाफा होगा।