हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और आपदा-प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार से रेवेन्यू डेफिसिट को कवर करने के लिए स्पेशल पैकेज की मांग रखी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद करने से राज्य की फाइनेंशियल हेल्थ पर बहुत बुरा असर पड़ेगा और कहा कि हिमाचल प्रदेश की तुलना उन दूसरे राज्यों से नहीं की जा सकती जिनका आरडीजी बंद कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने वित्त मंत्री को अवगत कराया कि हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और सीमित संसाधनों के कारण हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र के विशेष सहयोग की अपेक्षा कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य के लिए आरडीजी कंट्रीब्यूशन लगभग 12.7 परसेंट था जो नागालैंड के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा था। उन्होंने कहा कि बड़े राज्य इसे बंद करने का सामना कर सकते हैं लेकिन हिमाचल प्रदेश की इकॉनमी नहीं कर सकती।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और पर्यटन ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने आपदा राहत मद में लंबित राशि को शीघ्र जारी करने का भी अनुरोध किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश की स्थिति पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रस्तावों का मूल्यांकन संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय कर किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक के बाद उम्मीद जताई कि केंद्र से सकारात्मक निर्णय मिलने पर राज्य में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और आम जनता को राहत पहुंचेगी।














