Dollar vs Rupee: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रुपया लगातार दबाव में नजर आ रहा है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 64 पैसे टूटकर 93.28 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा ने 93 का स्तर पार किया है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
इससे पहले गुरुवार को रुपया 92.63 के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात के बिगड़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना दिया। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक रुपया करीब 3.64 प्रतिशत कमजोर हो चुका है, जिससे यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, भारत का बढ़ता आयात बिल, खासकर कच्चे तेल रुपये की कमजोरी को और बढ़ा रहा है।
महंगाई बढ़ने की आशंका
रुपये की गिरावट का सीधा असर आम जनता पर भी पड़ सकता है। आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। साथ ही विदेश यात्रा और पढ़ाई भी महंगी हो सकती है।
हालांकि, रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है ताकि रुपये को अत्यधिक गिरावट से बचाया जा सके। आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और केंद्रीय बैंक की नीतियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।