अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी नौसेना अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज(Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की कार्रवाई कर सकती है। यह वही अहम समुद्री मार्ग है, जिसे लेकर ट्रंप लंबे समय से ईरान पर बिना शर्त खोलने का दबाव बनाते रहे हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिकी नौसेना उन सभी जहाजों को रोक सकती है जो होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने की कोशिश करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी इशारा किया कि भविष्य में हालात सामान्य होने पर सभी जहाजों को पूरी तरह आवाजाही की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल उनका कहना है कि ईरान के रवैये के कारण ऐसा माहौल नहीं बन पा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम ?
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे रणनीतिक रास्तों में से एक माना जाता है, क्योंकि मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से से निकलने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ईरान ने इसे पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वह कुछ तेल टैंकरों से भारी शुल्क लेकर उन्हें गुजरने की अनुमति देता है, जो कई बार लाखों डॉलर तक पहुंच जाता है।
जानकारी के मुताबिक ईरान इस मार्ग से अपने तेल निर्यात को भी जारी रखे हुए है और हाल के महीनों में वह प्रतिदिन लगभग 18.5 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात करने में सफल रहा है। इसी कारण ट्रंप का मानना है कि इस मार्ग पर सख्ती से ईरान की आर्थिक कमाई पर असर डाला जा सकता है, जिसका उपयोग वह कथित तौर पर अपनी सरकार और सैन्य गतिविधियों में करता है।
अमेरिका के लिए यह कदम क्यों है जटिल ?
हालांकि यह कदम अमेरिका के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में पूरी तरह नाकेबंदी की स्थिति बनती है, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इसी वजह से अब तक अमेरिकी नौसेना ने ईरानी तेल टैंकरों को पूरी तरह रोकने से परहेज किया है, ताकि वैश्विक आपूर्ति बाधित न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें। हाल ही में अमेरिका ने ईरान को एक अस्थायी राहत भी दी थी, जिससे वह समुद्र में मौजूद टैंकरों के जरिए तेल निर्यात जारी रख सका और बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचा।