उत्तर प्रदेश के बागपत(Baghpat) के बड़ौत इलाके में स्थित केमिकल इंडस्ट्री इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई फैक्ट्रियां पिछले करीब 15 दिनों से बंद पड़ी हैं। मशीनें ठप हैं और उत्पादन पूरी तरह रुक गया है, जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले मजदूरों और स्थानीय कारोबार पर पड़ रहा है।
राम श्री केमिकल्स के सीईओ एस.के. राजपूत के अनुसार, उनकी कंपनी पेस्टिसाइड और औद्योगिक रसायनों का उत्पादन करने के साथ-साथ विदेशों में निर्यात भी करती है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उद्योग को दोहरे संकट में डाल दिया है। एक तरफ निर्यात ऑर्डर लगातार रद्द हो रहे हैं और बंदरगाहों पर माल अटका हुआ है, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
कच्चे माल की कीमत में हुई 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी
राजपूत ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके साथ ही इसकी उपलब्धता भी कम होती जा रही है, जिससे उत्पादन और अधिक प्रभावित हो रहा है। उनकी कंपनी का मुख्य निर्यात मिडिल ईस्ट देशों में होता था, लेकिन हालिया तनाव और युद्ध के कारण अधिकांश ऑर्डर कैंसिल हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि बड़ौत स्थित उनकी फैक्ट्री पिछले 15 दिनों से पूरी तरह बंद है। पहले जो रॉ सल्फर 48 से 50 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब बढ़कर करीब 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। गैस की कमी के चलते उन्हें कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, लेकिन कोयले के दाम भी 8 रुपये से बढ़कर 12 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
निर्यात की स्थिति भी चिंताजनक
निर्यात की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। उनके 15 कंटेनर मुंद्रा पोर्ट पर फंसे हुए हैं, जबकि मिस्र के अलेक्जेंड्रिया पोर्ट पर 10 कंटेनर अटके हुए हैं। पहले जहां एक कंटेनर का भाड़ा लगभग 1000 डॉलर होता था, अब यह बढ़कर 4500 से 5000 डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा 300 डॉलर का अतिरिक्त वॉर सरचार्ज भी देना पड़ रहा है। मार्च महीने में ही करीब 13 से 14 करोड़ रुपये के ऑर्डर रद्द हो चुके हैं।
किसानों पर भी असर पड़ना तय
घरेलू बाजार में भी पिछले 20 से 25 दिनों के भीतर कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कीमतों में तेजी आई है, जिससे छोटे व्यापारियों और खरीदारों पर भी असर पड़ रहा है। राजपूत ने बताया कि पेस्टिसाइड का इस्तेमाल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्नीचर, रियल एस्टेट, पेंट और लेदर इंडस्ट्री में भी होता है। ऐसे में इस संकट का सीधा असर न केवल उद्योगों पर, बल्कि आम उपभोक्ताओं और किसानों पर भी पड़ना तय है।