Maa Brahmacharini Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन, 20 मार्च 2026 को देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां का यह रूप तप, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, जो भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी अपने मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। देवी के इस रूप की उपासना से आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।
पूजा का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी की आराधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है, जिनके जीवन या व्यवसाय में बार-बार बाधाएं आती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति को साहस प्रदान करती है और उसकी बड़ी इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति देती है। इस दिन मां को प्रसन्न करने से जीवन में सुख, शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
शुभ मुहूर्त और आरती का समय
20 मार्च को सूर्योदय के बाद किसी भी शुभ समय में पूजा की जा सकती है। विशेष फल प्राप्ति के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। इस समय की गई पूजा मानसिक शांति प्रदान करती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। आरती के लिए सुबह पूजन के तुरंत बाद और शाम को सूर्यास्त के समय का समय सर्वोत्तम माना गया है। परिवार के साथ मिलकर आरती करने से आपसी संबंध मजबूत होते हैं।
प्रिय भोग और पूजन सामग्री
मां ब्रह्मचारिणी को सादगी अत्यंत प्रिय है। इस दिन उन्हें चीनी, गुड़, मिश्री या पंचामृत का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और नकारात्मकता कम होती है।
मां ब्रह्मचारिणी की सरल पूजन विधि
-
सुबह स्नान कर सफेद या पीले वस्त्र धारण करें
-
मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं
-
चमेली या कमल के फूल अर्पित करें
-
भोग के रूप में चीनी, मिश्री या पंचामृत चढ़ाएं
-
मंत्र जाप करें और ध्यान लगाएं
-
अंत में आरती कर क्षमा प्रार्थना करें
इस प्रकार श्रद्धा और विधि-विधान से की गई मां ब्रह्मचारिणी की पूजा जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लाती है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी कृपा से साधक के सभी कार्य सफल होते हैं और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।
Read More:
‘अयोध्या बनी आस्था की राजधानी’, श्रीराम यंत्र स्थापना समारोह में CM योगी का बयान

