Fake Job Racket: राजस्थान के जालोर जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े ठगी रैकेट का खुलासा हुआ है। कोतवाली थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी राकेश जीनगर को गिरफ्तार किया है, जो पिछले चार वर्षों से युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर करोड़ों रुपये ठग रहा था। आरोपी खुद को जयपुर नगर निगम और डीएलबी से जुड़ा अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतता था।
खुद को अधिकारी बताकर करता था ठगी
पुलिस के अनुसार, राकेश जीनगर पाली जिले के तखतगढ़ का रहने वाला है और फिलहाल जालोर के रतनपुरा रोड स्थित शकर वाटिका इलाके में रह रहा था। वह खुद को शहरी आजीविका केंद्र में योजना प्रभारी बताकर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देता था। इसके बदले वह प्रति व्यक्ति 3 लाख से 10 लाख रुपये तक वसूलता था।
फर्जी ईमेल से भेजता था जॉइनिंग लेटर
आरोपी ठगी को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाता था। वह जयपुर नगर निगम के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर जॉइनिंग लेटर भेजता था, जिससे पीड़ितों को विश्वास हो जाता था कि उनकी नौकरी लग गई है। इतना ही नहीं, वह जालोर के लालपोल स्थित शहरी आजीविका केंद्र में युवाओं को बैठाकर नौकरी का दिखावा भी करता था।
डेढ़ साल तक बिना वेतन बैठाए रखा
जांच में सामने आया है कि आरोपी कई युवाओं को करीब डेढ़ साल तक बिना वेतन और बिना किसी वास्तविक काम के वहां बैठाए रखता था। इस दौरान पीड़ितों को उम्मीद रहती थी कि उन्हें जल्द ही वेतन और स्थायी नौकरी मिलेगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।
नगर परिषद ने भवन किया सीज
जानकारी के अनुसार, आरोपी जिस नगर परिषद भवन से इस फर्जी रैकेट को चला रहा था, उसे पहले भी दो बार बंद किया गया था, लेकिन हर बार वह ताला तोड़कर फिर से वहां कब्जा कर लेता था। इस बार नगर परिषद ने सख्ती दिखाते हुए भवन को सीज कर दिया है।
पीड़ितों की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब लंबे समय तक नौकरी और वेतन नहीं मिलने पर पीड़ितों ने विरोध शुरू किया। 27 मार्च को हरियाली निवासी मुकेश, रणछोड़ और रितिक ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि रितिक से 10 लाख रुपये और मुकेश व रणछोड़ से 3-3 लाख रुपये की ठगी की गई।
200 लोगों से 12-15 करोड़ की ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अब तक करीब 200 लोगों को निशाना बनाकर 12 से 15 करोड़ रुपये तक की ठगी कर चुका है। शुरुआत में 11 पीड़ितों से 56 लाख रुपये वसूलने की जानकारी मिली थी, लेकिन अब तक 30 से अधिक पीड़ित सामने आ चुके हैं। पुलिस अन्य शिकायतों को भी इस मामले में जोड़कर जांच कर रही है।
सभी नियुक्ति पत्र निकले फर्जी
जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी द्वारा जारी किए गए सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं और किसी भी नगर निकाय के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका कोई अस्तित्व नहीं है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।
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