मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के आदिवासी क्षेत्र खालवा के रहने वाले रामसिंह काजले ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती। 10वीं कक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी, लेकिन हार नहीं मानी। खेती को ही अपना रास्ता बनाया और आज एक सफल किसान उद्यमी बनकर सामने आए हैं।
हजारों किसानों को जोड़ा साथ
रामसिंह काजले ने अकेले आगे बढ़ने के बजाय अन्य किसानों को भी साथ जोड़ा। आज उनकी कंपनी से 34 गांवों के करीब 2026 किसान जुड़े हुए हैं। खास बात यह है कि सभी किसान इस कंपनी के शेयरधारक हैं, जिससे कंपनी का संचालन भी उन्हीं के हाथ में है और मुनाफा भी उन्हें ही मिलता है।
जैविक खेती से बढ़ाया मुनाफा
यह कंपनी मुख्य रूप से जैविक ‘303 गेहूं’ के उत्पादन पर काम कर रही है। किसान अपनी उपज कंपनी को देते हैं, जिसके बदले उन्हें बाजार से बेहतर दाम मिलता है। आमतौर पर मंडी में जैविक और सामान्य फसल का एक जैसा मूल्य मिलता है, लेकिन यहां किसानों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित कीमत दी जा रही है।
खुद का ब्रांड बनाकर बिक्री
कंपनी ने ‘तृप्ति’ नाम से अपना ब्रांड भी विकसित किया है। अब गेहूं की ग्रेडिंग और पैकिंग के बाद इसे सीधे बाजार में बेचा जा रहा है। लगभग 33 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गेहूं बेचा जा रहा है, जबकि 30 किलो का बैग करीब 1000 रुपये में उपलब्ध है।
मंडी से बाहर मिला फायदा
पहले किसान अपनी उपज मंडी में बेचते थे, जहां व्यापारी सभी फसल को एक जैसा मानकर कम कीमत देते थे। कंपनी बनने के बाद अब किसानों को सीधे उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ा है और आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
संस्था के सहयोग से बदली तस्वीर
इस पहल में ‘आगा खां संस्था ‘ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्था ने किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए, जिससे इस मॉडल को सफल बनाने में मदद मिली।
2017 से शुरू हुआ सफर
इस कंपनी की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। करीब एक दशक के भीतर यह पहल बड़े स्तर पर पहुंच गई है और अब खालवा क्षेत्र के किसानों के लिए एक पहचान बन चुकी है।
लागत कम, मुनाफा ज्यादा
कंपनी के किसान खुद ही बीज तैयार करते हैं, जिससे बाहर से बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे खेती की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है। साथ ही जैविक खेती से जमीन की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
किसानों के लिए मजबूत मंच
आज यह कंपनी किसानों के लिए एक मजबूत मंच बन चुकी है, जहां अध्यक्ष से लेकर अन्य पदों पर किसान ही कार्यरत हैं। रामसिंह काजले की यह कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प और सही दिशा में प्रयास से कोई भी व्यक्ति बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
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