रूस ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह फैसला अमेरिकी टेक कंपनी मेटा के खिलाफ कड़ा कदम माना जा रहा है। रूस का कहना है कि मेटा ने देश के कानूनों का पालन नहीं किया, जिसके चलते यह प्रतिबंध लागू किया गया है।
क्रेमलिन की ओर से इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि की गई है। रूसी सरकार का आरोप है कि मेटा लगातार स्थानीय नियमों की अनदेखी कर रही थी, इसलिए व्हाट्सऐप पर बैन लगाना जरूरी हो गया।
रूसी सरकार का बयान
राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कानून का पालन न करने के कारण यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अब स्थानीय मैसेजिंग ऐप MAX का उपयोग करें।
सरकार के अनुसार, MAX एक राष्ट्रीय स्तर पर विकसित मैसेंजर है और यह देश के नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित और बेहतर विकल्प साबित होगा। अधिकारियों का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म सरकारी सेवाओं और रोजमर्रा के कार्यों को एक ही जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
निगरानी को लेकर उठे सवाल
हालांकि, इस फैसले के बाद विवाद भी शुरू हो गया है। कुछ आलोचकों का कहना है कि MAX ऐप के माध्यम से यूजर्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। उनका आरोप है कि यह प्लेटफॉर्म निगरानी का साधन बन सकता है।
वहीं रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐप का मकसद केवल सेवाओं को सरल और केंद्रीकृत बनाना है, न कि किसी की निजी जानकारी पर नजर रखना।
बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच फैसला
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका लगातार रूस पर दबाव बना रहा है, वहीं रूस भी अपने ‘संप्रभु संचार ढांचे’ को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाट्सऐप पर लगाया गया प्रतिबंध रूस की उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह विदेशी टेक कंपनियों को अपने नियमों के दायरे में लाना चाहता है।