देशभर में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। IMD के अनुसार बिहार से लेकर पहाड़ी राज्यों तक एक मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है, जिसके चलते अगले कुछ दिनों में तेज हवाएं, धूल भरी आंधियां, बारिश और कई स्थानों पर ओलावृष्टि होने की संभावना है।
यह बदलाव सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं माना जा रहा, क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों और किसानों पर पड़ सकता है। खासतौर पर खेतों में तैयार खड़ी रबी की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह मौसम जहां एक ओर गर्मी से राहत देगा, वहीं दूसरी ओर परेशानी भी बढ़ा सकता है।
तकनीकी रूप से पश्चिमी विक्षोभ एक ऐसी मौसम प्रणाली है, जो भूमध्य सागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर भारत के मौसम को प्रभावित करती है। इसी प्रणाली के सक्रिय होने से उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदलने की संभावना है। मौसम विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए पीला और नारंगी स्तर की चेतावनी जारी की है, जिससे साफ है कि स्थिति हर जगह समान नहीं है, लेकिन सतर्क रहने की आवश्यकता जरूर है।
उत्तर भारत में बढ़ेगी मौसम की हलचल
मौसम विभाग के अनुसार 30 से 31 मार्च तक पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह सक्रिय रहेगा और इसका असर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगा। इन राज्यों में तेज आंधी, बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। यह प्रभाव 1 से 2 अप्रैल तक रुक-रुक कर जारी रह सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं का अनुमान
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में मौसम सुहावना तो रहेगा, लेकिन जोखिम भी बना रहेगा। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से कुछ राहत मिलेगी, हालांकि तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, धूल उड़ने और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार में आंधी-बारिश का असर
उत्तर प्रदेश में 29 मार्च से मौसम तेजी से बदलेगा और कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने तथा बारिश होने की संभावना है। इसी तरह Bihar के पटना, दरभंगा और भागलपुर सहित कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की चेतावनी
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में बारिश के साथ-साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और भूस्खलन तथा सड़क मार्ग बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है।
किसानों के लिए बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी की फसल इस समय कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने, खुले स्थानों से दूर रहने और मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी है।
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