इलाहाबाद उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन तलाक और फतवे पर अहम टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा है कि पर्सनल लॉ के नाम पर मुस्लिम महिलाओं समेत सभी नागरिकों को प्राप्त अनुच्छेद 14, 15, 21 के मूल अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और जिस समाज में महिलाओं की इज्जत नहीं होती उसे सिविलाइज्ड नहीं कहा जा सकता. न्यायालय ने कहा है कि लिंग के आधार पर मूल व मानवाधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता. मुस्लिम पति ऐसे तरीके से तलाक नहीं दे सकता जिससे समानता व जीवन के मूल अधिकार का हनन होता हो. संविधान के दायरे में