दुनिया में हर तरफ मची है तबाही! क्या सच हो रहे हैं कलियुग के संकेत?
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हिंदू धर्म में कलियुग को चार युगों का अंतिम चरण और अधर्म के बढ़ने का समय माना गया है।
श्री भागवत पुराण और श्री विष्णु पुराण में कलियुग के कई संकेतों का विस्तार से वर्णन मिलता है।
मान्यता है कि इस युग में लोग धीरे-धीरे धर्म, सत्य और नैतिक मूल्यों से दूर होने लगते हैं।
प्रेम, विश्वास और अपनापन कम होकर रिश्तों में स्वार्थ और लालच बढ़ने लगता है।
व्यक्ति का सम्मान उसके चरित्र से नहीं, बल्कि धन, पद और प्रभाव से होने लगता है।
बाढ़, सूखा और मौसम की चरम घटनाओं को कई लोग कलियुग के संकेतों से जोड़कर देखते हैं।
आज के समय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तनाव और नैतिक गिरावट को भी कई लोग इन्हीं संकेतों से जोड़ते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कल्कि अवतार कलियुग के अंत और नए युग की शुरुआत का संकेत होंगे।
कलियुग की चर्चा हमें अपने कर्म, व्यवहार और जीवन मूल्यों पर विचार करने की प्रेरणा देती है।
समय चाहे कोई भी हो, सत्य, ईमानदारी और अच्छे कर्मों का महत्व हमेशा सर्वोपरि रहता है।