पराली का मुद्दा बना हरियाणा और पंजाब के बीच कलह का कारण, दोनों राज्य दे रहे हैं अपने-अपने तर्क

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एसवाईएल के बाद पराली प्रबंधन का मुद्दा अब हरियाणा और पंजाब राज्यों के बीच कलह का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने-अपने आंकड़े पेश कर पराली पर सियासी जंग लड़ रहे हैं।

उधर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली में बढ़े हुए धुएं पर तल्ख दिखाई दे रहा है। दरअसल, धान की खेती कम समय में हो जाने वाली फसल है इसके बाद किसान उसी भूमि पर गेहूं की फसल की बुवाई करना चाहता है, समय कम होने से धान की फसल के अवशेष यानी पराली को संभाल पाना आम किसान के लिए मुश्किल है। मजबूरन किसान पराली को आग के हवाले कर भूमि को जोत योग्य बनाता है।

किसान पराली न जलाएं और इसके समुचित प्रबंध हो, शायद इस पर किसी भी राज्य की सरकार गंभीरता से काम नहीं कर रही जितना समय रहते होना चाहिए। पराली प्रबंधन को लेकर जिन उपकरणों की आवश्यकता समझी जाती है, उनकी कीमत करोड़ों में हैं, जिनका आम किसान का खरीद पाना मुमकिन नहीं है।

वहीं, कुछ ऐसे कृषि उपकरण भी हैं, जिनसे पराली वाली भूमि में नई फसल की बुवाई हो सकती है, मगर उनके लिए भी ज्यादा हॉर्स पावर के ट्रैक्टरों की आवश्यकता होती है, इतनी बड़ी क्षमता के ट्रैक्टर खरीदना भी हर किसान के बूते की बात नहीं। पराली का जब सीजन आता है, तो इसके जलाने से धुएं के गुबार उड़ते हैं, किसान के मित्र कीट और पेड़ों पर रहने वाले पक्षी भी अकाल मौत का ग्रास बनते हैं।

वहीं, हरियाणा और पंजाब में जलने वाली पराली से उठने वाले धुएं का असर राजधानी चंडीगढ़ की बजाय दिल्ली में ज्यादा बताया जा रहा है, आखिर ऐसा क्यों है, यह अपने आप मे विचारणीय विषय है।

इस बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जब संज्ञान लिया तो हरियाणा और पंजाब की सरकार पराली जलाने के दोषारोपण एक-दूसरे पर करने लगी। दोनों राज्यों की सरकारें इस मुद्दे पर आमने-सामने आ खड़ी हुई हैं।

वहीं, कृषि उपनिदेशक बाबूलाल के अनुसार हरियाणा के अकेले सिरसा जिले में अब तक 163 आगजनी की घटनाओं को हरसेक द्वारा चिह्नित किया गया है जिनमें से 84 चालान कर दो लाख सैंतीस हजार पांच सौ रुपये जुर्माना किसानों पर लगाया गया है।

बता दें कि किसान धान की खेती मुख्यत: हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, अंबाला, करनाल और पानीपत के साथ-साथ पंजाब के फाजिल्का, मुक्तसर, पटियाला, मानसा, संगरूर आदि जिलों में करते हैं।