भारतीय दूरसंचार नियामक ने शुक्रवार को कॉल ड्रॉप को लेकर कड़े नियमों की घोषणा की और कहा कि जो दूरसंचार ऑपरेटर मानदंडों को पूरा नहीं करेंगे, उन पर कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कहा, 'अगर सेवा प्रदाता नए शुरू किए गए DCR (कॉल ड्रॉप की दर) बेंचमार्क तक पहुंचने में नाकाम होते हैं तो उन पर ग्रेडेट फाइनेंसियल डिसइंसेटिव कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत जुर्माना लगाया जाएगा. जुर्माने की रकम इस पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बेंचमार्क से कितनी दूर हैं.' इसमें बताया गया कि बेंचमार्क को पूरा नहीं करने पर

आम उपभोक्ता अब आसानी से मोबाइल कंपनियों के टैरिफ प्लान का पता लगा सकेंगे। साथ ही वे उनके बीच तुलना भी कर पाएंगे। दूरसंचार नियामक ट्राई इस मामले में पारदर्शिता लाने के लिए जल्द ही अहम कदम उठाने की तैयारी में है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन आरएस शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में उपभोक्ता ट्राई की वेबसाइट पर विभिन्न टेलिकॉम कंपनियों के टैरिफ देख सकेंगे। टेलिकॉम नियामक इस डाटा को अन्य सॉफ्टवेयर निर्माताओं को इस्तेमाल करने की अनुमति भी देगा। इससे भविष्य में ऐसे डाटा की मदद से विभिन्न कंपनियों के टैरिफ

कॉल की क्वॉलिटी सुधारने के मकसद सें दूरसंचार नियामक ट्राई एक बहुत जल्द ही एक नया  ऐप लेकर आएगा. इस  ऐप की मदद से आम लोग अपने टेलीकॉम ऑपरेटर की वॉयस कॉल क्वॉलिटी की रेटींग दें सकेंगे. साथ ही टेलीमार्केटिंग करने वालों की अनचाही कॉलों पर लगाम लगाने के लिए 'डू नॉट डिस्टर्ब' (डीएनडी) को मजबूत करने की भी योजना बनाई है. इस कार्यक्रम का लक्ष्य टेलीमार्केटिंग करने वाली कंपनियों द्वारा परेशान करने वाले कॉलों को रोकना है. गौरतलब है कि पहले भी ट्राई क्वॉलिटी सुधारनें के मकसद ट्राई ने प्रस्ताव रखा है कि सर्विस प्रोवाइडर को कॉल ड्रॉप और सेवाओं