चंडीगढ़ में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। स्वाइन फ्लू के तीन और नए मामले सामने आए हैं। इनमें पीजीआई के एक डॉक्टर समेत एक साल से कम उम्र के दो बच्चे शामिल हैं। चंडीगढ़ में अब तक उनतीस लोगों को स्वाइन प्लू की पुष्टि हो चुकी है। अकेले पीजीआई के पांच डॉक्टर और एक नर्स भी स्वाइन फ्लू की चपेट में हैं। इससे पहले चंडीगढ़ में स्वाइन प्लू से पांच मरीजों की मौत हो चुकी है। पीजीआई ने स्वाइन प्लू से ग्रसित बच्चों के लिए एडवांस पेडिएट्रिक सेंटर में अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया है। स्वास्थ्य विभाग ने

हरियाणा और इसकी राजधानी चंडीगढ़ में स्वाइन फ्लू ने अपने पैर पसार लिए हैं। चंडीगढ़ के कारण पंचकूला में इसका ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। हरियाणा में अब तक जहां 6 मामले सामने आए हैं, चंडीगढ़ में दो डॉक्टरों समेत स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 17 हो गई है। स्वाइन फ्लू को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से खास इंतजाम किए गए हैं। अस्पतालों में स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं। सेंट्रल कंट्रोल रूम से संदिग्ध मरीज को तुरंत फोन आने पर रेफर कर दिया गया है, जो कि सेक्टर नौ हेल्थ डिपार्टमेंट में बनाया गया है। दूसरी तरफ मच्छरों से

चंडीगढ़ में स्वाइन फ्लू से मौत का मामला सामने आया है। मृतक का नाम श्याम वर्मा है जोकि सेक्ट-37 के रहने वाले थे और 14 जुलाई को उन्हें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। 6 दिन तक वेंटीलेटर पर रहने के बाद मरीज की मौत हो गई। इसके अलावा दो और मरीजों का भी जीएमसीएच अस्पताल में इलाज चल रहा है।

शिमला आईजीएमसी में स्वाइन फ्लू से रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी की मौत के बाद डेंटल कॉलेज का एक कर्मचारी भी इस बीमारी की चपेट में आ गया है. यह कर्मी प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग में कार्यरत है. यह वह विभाग है जिसके हेड कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आरपी लुथरा हैं. कॉलेज के ही एक कर्मी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने से कॉलेज में हड़कंप मच गया है. इस विभाग में कुल 40 लोगों का स्टाफ है. इसमें पीजी डॉक्टर तक शामिल है. हवा के संपर्क से यह रोग अन्य में भी फैलने की आशंका बनी है. बुधवार को अपने ही विभाग के कर्मी

आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरजी सूद की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई है। उन्हें आईजीएमसी से पीजीआई ले जाया जा रहा था। दोपहर तीन बजे सोलन के बड़ोग के पास इनकी मौत हो गई। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने इसकी पुष्टि की है।  रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष पिछले ग्यारह दिन से अस्पताल में दाखिल थे। डॉक्टरों की निगरानी में इन्हें आईसीयू में रखा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक इनकी हालत काफी गंभीर थी। ऐसे में रविवार को डॉक्यूमेंट संबंधी सभी प्रक्रिया पूरी की गई। दोपहर बाद डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ की मौजूदगी में उन्हें

स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस A से होने वाला इनफेक्शन है. इस वायरस ने अब  हमला करने का वक्त बदल गया है, अब ये सर्दियों के बजाय गर्मियों में भी हमला बोलने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस का स्ट्रेन बदलने पर भी यह नया बदलाव हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो यह खतरे की घंटी भी हो सकती है, क्योंकि मौजूदा दवाएं इसकी रोकथाम में पूरा असर नहीं करेंगी. हिमाचल ही नहीं बल्कि राज्य से बाहर की बड़ी प्रयोगशालाओं में भी स्ट्रेन बदलने के संदेह पर जांच चल रही