वॉशिंगटन दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस देवे के गश्त लगाने पर गुरुवार को चीन ने नाराजगी जताई. उसने कहा कि अमेरिका का यह कदम चीन को भड़का सकता है. डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार अमेरिकी नौसेना ने विवादित दक्षिण चीन सागर क्षेत्र के उस कृत्रिम द्वीप के पास युद्धपोत भेजा, जिस पर चीन अपना दावा जताता है. बताया जा रहा है कि लक्षित मिसाइल विध्वंसक से लैस पोत यूएसएस देवे ने मिस्चीफ टापू के 20 किलोमीटर के दायरे में गश्त लगाई है. यह टापू स्प्रैटली द्वीपसमूह का हिस्सा है, जिस पर कई देश अपना

बीजिंग चीन की ओर से विवादित दक्षिण चीन सागर एक विवादित द्वीप में रॉकेट लांचर तैनात किए जाने से तनाव गहरा गया है. चीन के सरकारी अखबार डिफेंस टाइम्स के मुताबिक वियतनाम के नौसेना ठिकाने के नजदीक ये रॉकेट लांचर तैनात किए गए हैं. वहीं, चीन की दलील है कि दक्षिण चीन सागर द्वीप में सैन्य निर्माण अपनी सुरक्षा तक ही सीमित रहेगा. चीन का कहना है कि यह द्वीप उसके क्षेत्र में आता है और यहां पर वह जो चाहे कर सकता है. चीनी अखबार ने बताया कि नोरीनको CS/AR-1 55mm रॉकेट लांचर डिफेंस सिस्टम्स को स्प्राटल द्वीप समूह के फियरी क्रॉस

बीजिंग दक्षिण चीन सागर में विस्तार को लेकर चिंताओं के बीच बीजिंग ने बुधवार को अपने पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत का जलावतरण किया है, जो यूक्रेन से खरीदे गए मौजूदा पोत के साथ शामिल होगा. इससे बीजिंग की सैन्य क्षमताओं में भी बढ़ोतरी होगी. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार 'चीन शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन'  (सीएसआईसी) के पूर्वोत्तर डालियान शिपयार्ड में प्रक्षेपण समारोह के दौरान 50,000 टन के इस नए विमानवाहक पोत को सूखे डॉक से पानी में स्थानांतरित किया गया. चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह चीन का दूसरा विमानवाहक पोत है, जिसका अभी नाम नहीं रखा गया है. जहाज