दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी-सी38 रॉकेट शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. ये पृथ्वी सर्वेक्षण उपग्रह कार्टोसैट-2 श्रेणी का उपग्रह आई इन द स्काई है. कार्टोसैट-2 उपग्रह चीन और पाक सीमा पर होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखेगा और इससे भारत की सैन्य शक्ति में इजाफा हुआ है. इस उपग्रह के अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित होने के बाद भारत के निगरानी सैटेलाइट्स की संख्या अब 13 हो गई है, जो निगरानी के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों की मैपिंग करते हैं. जल और थल दोनों जगहों पर ये सैटेलाइट्स कारगर हैं. इसरो

दिल्ली इसरो ने शुक्रवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और कामयाबी अपने नाम की. इसरो ने पीएसएलवी-सी38 का सफल प्रक्षेपण किया है. पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित पूरे देश के लोगों की ओर से बधाई संदेश दिए जा रहे हैं. पीएम मोदी की ओर से ट्वीट कर कहा गया कि इसरो की 40वीं सफल उड़ान के लिए बधाई! ध्रुवीय प्रक्षेपण यान से 15 देशों के 31 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर इसरो ने देशवासियों को गर्व करने का मौका दिया है. इसरो की सफल उड़ान पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी भावनाएं व्यक्त

इसरो ने जीसैट 9 लॉन्च किया । इसे श्रीहरिकोटा के स्पेस पोर्ट से जीएसएलवी-एफ09 रॉकेट के जरिए छोड़ा गया। सैटेलाइट का वजन 2,195 किलोग्राम है, जो 12-केयू बैंड के ट्रांसपोडर्स लेकर गया है। इस मिशन को अगले 12 साल तक के लिए डिजाइन किया गया है। पहले इसका नाम 'सार्क सैटेलाइट' था, लेकिन पाकिस्तान के बाहर होने के बाद इसे साउथ ईस्ट सैटेलाइट नाम दिया गया। इसे साउथ एशिया रीजन के डेवलपमेंट के लिए डिजाइन किया गया है। चूंकि, ये क्षेत्र आपदा संभावित है, इसलिए आपदा के समय ये सैटेलाइट इन देशो के बीच कम्युनिकेशन में मददगार होगा। इसके जरिए साउथ एशिया