वानाक्राई के बाद एक बार फिर यूक्रेन, रूस और यूरोप में कई दिग्गज कंपनियों पर रैनसमवेयर का बड़ा हमला हुआ है। मंगलवार को रूस और यूक्रेन से शुरू हुए इस हमले ने देखते ही देखते यूरोप के कई देशों और अमेरिका के कई सर्वरों को अपनी चपेट में ले लिया। रूस में जहां सबसे बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट इसकी चपेट में आई वहीं यूक्रेन में सरकारी मंत्रालयों, बिजली कंपनियों और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम बैठ गए। भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी भी इस साइबर हमले की जद में आ गया। पोर्ट के एक टर्मिनल का संचालन इससे प्रभावित हुआ

सिएटल भारत समेत करीब 100 देश अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से चोरी किए गए ‘साइबर हथियारों’ की मदद से व्यापक स्तर पर किए गए साइबर हमले का शिकार हुए हैं. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, सबसे पहले स्वीडन, ब्रिटेन और फ्रांस से साइबर हमले की खबर मिली. सुरक्षा सॉफ्टवेयर कंपनी ‘अवैस्ट’ ने बताया कि मालवेयर की गतिविधि बढ़ने की बात शुक्रवार (12 मई) को पता चली. कंपनी ने कहा कि यह ‘‘जल्द ही व्यापक स्तर पर फैल गया.’’ कंपनी ने कहा कि कुछ ही घंटों में विश्वभर में 75000 से अधिक हमलों का पता चला. इस बीच ‘मालवेयरटेक’ ट्रैकर ने पिछले 24 घंटों