दिल्ली रेल मंत्रालय ने देश भर के 20 रेलवे स्टेशनों को निजी कंपनियों को नीलाम करने का फैसला किया है. इसके तहत रेलवे स्टेशनों पर विश्वस्तीय सुविधाएं स्थापित करना कंपनियों की जिम्मेदारी होंगी, जबकि ट्रेन परिचालन, टिकट और सुरक्षा की देखरेख रेलवे संभालेगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लिस्ट में मुंबई का लोकमान्य तिलक टर्मिनल, मुंबई सेंट्रल (मुख्य), बोरिवली, पुणे, ठाणे, विशाखापत्तनम, हावड़ा, इलाहाबाद, कानुपर सेंट्रल, कामाख्या, फरीदाबाद, जम्मू तवी, उदयपुर शहर, सिकंदराबाद, विजयवाड़ा, रांची, कोझिकोड, यसवंतपुर, बैंगलोर कैंट, भोपाल और इंदौर जैसे स्टेशनों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत विकसित करने का फैसला किया है. खबरों के मुताबिक, सरकार ने इन स्टेशनों

देश की सबसे आधुनिक ट्रेन तेजस के पहले सफर के दौरान ही ट्रेन से हेडफोन चोरी होने और सीट पर लगी टीवी स्क्रीन को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना के बाद रेलवे अब ट्रेन में सस्ते हेडफोन देने की तैयारी कर रहा है। मीडिया की खबरों के मुताबिक, IRCTC ने एक हजार हेडफोन्स का ऑर्डर दे दिया है, जिसमें प्रत्येक की कीमत सिर्फ 30 रुपये है। तेजस में पहले जो हेडफोन मुसाफिरों के लिए मुहैया कराए गए थे, उसमें प्रत्येक की कीमत 200 रुपये थी। लेकिन ट्रेन के सामान के साथ छेड़छाड़ और चोरी की घटनाओं के बाद अब रेलवे

ट्रेनों की लेटलतीफी और भोजन की खराब क्वॉलिटी को लेकर अकसर आलोचना का शिकार बनने वाला इंडियन रेलवे अब महंगा सामान खरीदने को लेकर विवादों के घेरे में है। एक आरटीआई के जवाब में रेलवे ने खरीदे जाने वाले सामान की जो कीमत बताई है, वह हैरतअंगेज कर देने वाली है। मसलन, 100 ग्राम दही खरीदने की दर 972 रुपये बताई गई लेकिन जब इस खुलासे पर हंगामा मचा तो इंडियन रेलवे का सेंट्रल जोन बैकफुट पर आ गया। अब उसका तर्क है कि टाइपिंग की गलती से यह गड़बड़ी हुई है, लेकिन आरटीआई के जवाब में इतनी बड़ी लापरवाही

ट्रेनों की लेट-लतीफी को लेकर मिल रही शिकायतों पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि या तो ट्रेनों के समय पर चलने को सुनिश्चित करें या फिर कार्रवाई को तैयार रहें। मंत्रालय की तरफ से जोनल हेड को तुरंत रात के 10 बजे से सुबह 7 बजे तक एक वरिष्ठ स्तर के अधिकारी को तैनात करने को कहा गया है। ट्रेनों के परिचालन में देरी को रोकने के मकसद से स्थिति की निगरानी रखने और समस्याओं को सुलझाने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखते हुए इस समस्या

इंडियन रेलवे जल्द प्राइवेट कंपनियों को अपने प्राइवेट टर्मिनल्स से मालगाड़ी चलाने की इजाजत दे सकता है। इससे देश के रेलवे नेटवर्क पर भारतीय रेल की मोनोपॉली खत्म हो सकती है। सीमेंट, स्टील, ऑटो, लॉजिस्टिक्स, अनाज, केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स सेक्टर की कंपनियों ने रेलवे की स्पेशल फ्रेट ट्रेन ऑपरेशंस स्कीम के तहत अपनी फ्लीट चलाने में दिलचस्पी दिखाई है। इसकी जानकारी एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने दी है। अगर यह स्कीम सफल रहती है तो आगे चलकर प्राइवेट पैसेंजर ट्रेन चलाने की जमीन भी तैयार हो सकती है। टाटा स्टील, अडानी एग्रो, कृभको और कई अन्य प्राइवेट कंपनियों के पास पहले