पनामा पेपर्स मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सियासत पर बड़ा संकट आ गया है. शुक्रवार को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पनामा लीक केस में संयुक्त जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर नवाज शरीफ को दोषी करार दिया. इसके साथ ही 5 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से नवाज के खिलाफ फैसला देते हुए अयोग्य ठहरा दिया. नवाज को इसके बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी. कैसे हुआ था खुलासा 2013 में इंटरनैशनल कन्सॉर्टियम ऑफ इन्वैस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आई.सी.आई.जे.) ने पनामा पेपर्स के नाम से बड़ा खुलासा किया. उत्तरी व दक्षिणी अमरीका को भूमार्ग

इस्लामाबाद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अब एक नया खुलासा किया है. शरीफ ने बुधवार को कहा है कि अगर उन्हें पाकिस्तान की चिंता नहीं होती तो उन्होंने साल 1998 में न्यूक्लियर टेस्ट न करने के एवज में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के 5 अरब डॉलर देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया होता. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा, 'अगर मैं देश के प्रति ईमानदार न होता तो मैंने न्यूक्लियर टेस्ट न का करने के बदले में अमेरिका की ओर से दिए गए 5

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पनामागेट मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित दल के समक्ष बुधवार को हाजिर हुए. वह पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए इस तरह के पैनल के सामने पेश हुए. शरीफ ने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार ने कुछ नहीं किया है ये उनकी सरकार के खिलाफ साजिश है. शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने न्यायिक अकादमी रवाना होने के पहले अपने पिता और उनके प्रमुख सहयोगियों की एक तस्वीर पोस्ट करके ट्वीट किया है. आज के दिन ने इतिहास रच दिया है और बहु प्रतीक्षित और स्वागत योग्य उदाहरण

पाकिस्तान को अरब देशों और कतर के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश महंगी पड़ गई. आर्मी चीफ के साथ सऊदी अरब गए नवाज से सऊदी किंग सलमान ने दो टूक पूछ लिया- आप हमारे साथ हैं या आतंकवाद का समर्थन करने वाले कतर के. जाहिर है, नवाज के लिए ये मुश्किल और शर्मसार करने वाला लम्हा था. वैसे बीते 20 दिन में नवाज तीन बार और किरकिरी करा चुके हैं. पिछले महीने के आखिर में सऊदी में ही नवाज से ट्रम्प ने बातचीत नहीं की, इस्लामिक-अमेरिका समिट में उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला और शी जिनपिंग ने पिछले दिनों कजाकिस्तान में उनसे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में सऊदी अरब के दौरे पर थे, इस दौरान इस्लामिक समिट के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी वहां रहे. लेकिन कार्यक्रम के दौरान हुई नवाज शरीफ की अनदेखी से उनके देश पाकिस्तान में इसे 'बेइज्जती' करार दिया जा रहा है, और शरीफ की काफी आलोचना भी हो रही है. पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया में कहा जा रहा है, कि इस्लामिक समिट के दौरान नवाज शरीफ अलग-थलग पड़ गये, आतंकवाद के मुद्दे पर उन्हें अपनी राय नहीं रखने दी गई. स्पीच पर की थी ढाई घंटे की मेहनत दरअसल, इस्लामिक स्टेट समिट के दौरान अमेरिकी

जरदारी ने पेशावर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जब वह सत्ता में थे तो पाकिस्तान के अफगानिस्तान और भारत के साथ संबंध अच्छे थे. सभी जगह शांति का माहौल था. उन्होंने कहा, हमें अपने पड़ोसी देशों के बीच दोस्ती के संबंध बनाने चाहिए. लेकिन नवाज शरीफ की सरकार में ऐसा कुछ भी नहीं है. हालात बिगड़ते नजर आ रहे है. उन्होंने कहा कि वो युद्ध नहीं होगा, वो ऐसा होने नहीं देंगे. उन्होंने पड़ोसी देशो के साथ अनबन को लेकर नवाज सरकार की आलोचना की.

इस्लामाबाद पनामा केस में फंसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अब तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी प्रमुख इमरान खान ने पीएम नवाज पर नया आरोप लगाते हुए कहा कि नवाज शरीफ ने अलकायदा के मुखिया ओसामा बिन लादेन से पैसे लिए थे. इमरान खान ने आगे कहा कि नवाज ने ये पैसा जिहाद के नाम पर लिया था. पार्टी ने आरोप लगाया कि नवाज शरीफ ने बाद में उन पैसों का इस्तेमाल साल 1989 में तत्कालीन बेनजीर भुट्टो सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किया था. एक साक्षात्कार और किताब में इस बात का दावा किया गया है कि नवाज

इस्लामाबाद आज का दिन पाकिस्तान के लिए बहुत ही अहम रहा. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित पनामा पेपर्स लीक मामले पर अपना फैसला सुनाया. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 3-2 से फैसला सुनाया है. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सुंयुक्त जांच टीम बनाने को कहा है. गौर करने वाली बात है कि 2 जज नवाज को अयोग्य ठहराने के पक्ष में थे. संयुक्त जांच टीम, पैसा कतर भेजे जाने की जांच करेगी. कोर्ट ने कहा कि नवाज और उनके दोनों बेटों को जांच टीम के सामने पेश होना होगा. आपको बता दें कि यह फैसला