हरियाणा के किसान आज नीति आयोग का घेराव करेंगे। राष्ट्रीय स्तर के कई किसान संगठन एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे।  इसके बाद जंतर-मंतर पर धरना शुरू करेंगे। किसानों ने 9 अगस्त से जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करने की चेतावनी भी दी हुई है। किसानों के मुताबिक सरकार लगातार किसानों पर कुठाराघात कर रही है। फसलों के लाभकारी मूल्य नहीं दिए जा रहे साथ ही खाद, डीजल और खेती में आने वाली वस्तुओं के दामों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे किसानों में सरकार के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों की मांग है कि उनकी फसलों के लाभकारी

हरियाणा के किसान अपनी मांगों को लेकर आज चंडीगढ़ में सीएम मनोहर लाल से मिले। इसमें किसान संगठनों ने मीडिया की मध्यस्थता की मांग और किसानों की कर्जमाफी के अलावा स्वामीनाथन रिपोर्ट, पेंशन समेत अन्य मांगों पर बातचीत की। इस बैठक में सीएम के अलावा कृषि मंत्री ओपी धनखड़ बी मौजूद थे, लेकिनये बैठक बेनतीजा रही।

चंडीगढ़ में 17 किसान जत्थेबंदियों से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुलाकात की। सीएम से मुलाकात के बाद किसान जत्थेबंदियों ने सरकार को चेतावनी दी कि किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए, नहीं तो प्रदेश भर में आंदोलन का एलान किया जाएगा। वहीं, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किसानों ने जो मांगें रखी है, उन पर अमल किया जाएगा। दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि इस तरह की बैठक हर तीन महीने में होगी, क्योंकि इसके माध्यम से सुझाव और शिकायतें मिलती हैं।

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि उनकी सरकार प्रदेश के किसानों के हितों को लेकर हमेशा संवेदनशील है। प्रदेश सरकार ने मुआवजे के तौर पर किसानों को 2400करोड़ रुपये की राशि प्रदान की है. इस दौरान सीएम ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधा.

पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कहना है कि प्रदेश सरकार किसानों की कर्जमाफी, युवाओं के रोजगार और सूबे की खुशहाली के लिए वचनबद्ध है। इन मुद्दों पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह 19 जून को पंजाब विधानसभा में बयान देंगे। इसी दिन सरकार किसानों के लिए राहत पैकेज का एलान कर सकती है। जाखड़ शनिवार को लुधियाना में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल चार दिन पहेल किसानों और अन्य मुद्दों को लेकर धरने लगा रही थी, लेकिन जब विधानसभा में अपनी बात रखने और डिबेट करने का मौके आया तो वहां से वॉक

किसानों की आत्महत्या देश के कई राज्यों में सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है लेकिन पंजाब के इन सात जिलों में किसानों की आत्महत्या के मामलों में पिछले डेढ़ दशक में तिगुई बढ़ोतरी हुई है। पंजाब यूनिवर्सिटी के सर्वे में इस बात हुई पुष्टि हुई है। सर्वे में बताया गया है कि फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, होशियारपुर, पटियाला, रूपनगर, एसएएस नगर और श्री मुक्तसर साहिब में 2010 से 2016 के बीच 1309 किसानों ने खुदकुशी की। इससे पहले साल 2000 से 2011 के बीच यह आंकड़ा 365 था। जिनमें से 211 किसान थे और 154, कृषि मजदूर थे। जबकि

हरियाणा के किसान अब सिक्किम में जैविक खेती के गुर सीखेंगे। किसानों के विभिन्न समूहों को सिक्किम भेजा जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मकसद हरियाणा में जैविक खेती को बढ़ावा देना है। सिक्किम, नागालैंड व मेघालय में अधिकांश किसान जैविक खेती करते हैं। वहां के किसानों ने काफी समय पहले से ही पेस्टीसाइड व फर्टिलाइज युक्त खेती (रासायनिक खेती) से तौबा कर ली है। इतना ही नहीं, वहां की सरकारें भी किसानों की रासायनिक फसलों की खरीद नहीं करती। खरीद बंद होने की वजह से किसानों ने रासायनिक खेती करना ही छोड़ दिया है। अब हरियाणा बागवानी विभाग चाहता है कि हरियाणा के

किसानों का उग्र आंदोलन देखने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनका कर्ज माफ कर दिया है। मध्यप्रदेश सरकार ने तो पहले से बिना ब्याज का कर्ज दे रखा था और अब मूल भी माफ करने पर विचार चल रहा है। इसमें कोई शंका नहीं है कि मौजूदा व्यवस्था में किसानों को उनकी खून-पसीने की मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पा रहा है, लेकिन कर्ज माफी इलाज नहीं है। वास्तव में कर्ज माफी का पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और आम आदमी को ही इसका बोझ उठाना पड़ेगा। यूं होगा सब पर असर 1. आशंका जताई जा रही है कि

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसान आंदोलनों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. किसानों की उपज के लिए अपर्याप्त और कम खरीद मूल्य वर्तमान कृषि संकट का आधार है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कर्ज माफी अकेला समाधान नहीं है. अलग-अलग जगहों पर अलग समस्या हैं. कहीं किसानों की लागत बढ़ गई है और उत्पादन मूल्य में वृद्धि नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि मोदीजी ने चुनाव के समय कहा था कि लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर समर्थन मूल्य की घोषणा की जाएगी. उन्होंने जीएम सीड को

मोगा/रामपुरा फूल पंजाब में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की खुदकुशी करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. नया मामला मोगा और रामपुरा फूल से सामने आया है, जहां कर्ज में डूबे दो किसानों ने खुदकुशी कर ली. रामपुरा फूल के गांव झंडूके में रहने वाले जुगराज सिंह पर 10 लाख रूपए का कर्ज था, जिससे तनाव में आकर उन्होंने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली. वहीं, मोगा के खोटे गांव में भी कर्ज से परेशान होकर जसविंदर सिंह नाम के एक किसान ने खुदकुशी कर ली. जसविंदर पर लाखों रुपए का कर्ज था, जिसकी वजह से वो कई